संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों के लिए कई साल से मांग उठ रही है लेकिन उस पर सहमति नहीं बन पा रही है। भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील की सदस्यता वाले जी 4 देश लगातार मांग रहे हैं कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या को बढ़ाया जाए। इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने जापान की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार ‘पूरी तरह से आवश्यक’ है। गुटरेस ने एक बार फिर से जोर देकर कहा कि पुरानी पड़ चुकी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र का गठन दूसरे विश्वयुद्ध के बाद हुआ था लेकिन तब से लेकर अब तक इसमें कोई सुधार नहीं हुआ है। वह भी तब जब दुनिया में शीतयुद्ध के बाद भारी बदलाव हो रहा है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रखता है लेकिन वह इसका स्थायी सदस्य नहीं है। आइए समझते हैं कि कौन सुरक्षा परिषद में भारत की राह का कांटा बना हुआ है।
गुटरेस ने जी4 के सदस्य देश जापान में कहा, ‘वैश्विक समस्या समाधान ढांचा खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और वैश्विक वित्तीय संस्थाएं उस तरह से प्रभावी नहीं रही हैं जितनी कि इस चुनौतीपूर्ण माहौल में उनके होने की जरूरत थी।’ उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी सुधार जिसे करने की जरूरत है, वह है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद। अभी सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य देश हैं- चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका और रूस। इन देशों के पास वीटो पावर है। वहीं 10 गैर स्थायी सदस्य देश हैं जो दो साल के लिए चुने जाते हैं।








































