तेल अवीव/वॉशिंगटन: इजरायल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए सैन्य अभियान में शामिल होने का इजरायल का कोई इरादा नहीं है। उनका तर्क है कि मौजूदा टकराव और तेहरान पर लगातार आर्थिक दबाव से इजरायल के रणनीतिक हितों को पहले ही फायदा हो रहा है। स्मोट्रिच ने कहा ‘अभी इजरायल की इस टकराव में शामिल होने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मौजूदा हालात जिसमें ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है असल में हमारे लिए सबसे अच्छे हैं।’
हालांकि इजरायली अखबार वाईनेट न्यूज ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने इजरायली सरकार को बताया है कि इस हफ्ते ईरान के साथ भयानक लड़ाई होने वाली है जिसके बाद इजरायल ने ईरान के संभावित हमलों को रोकने और नये हमले करने की तैयारी कर ली है। लेकिन इजरायली सूत्रों का कहना है कि अगर ईरान का हमला नहीं होता है तो इजरायल भी फिलहाल नये हमले नहीं करेगा।
तो सवाल ये है कि आखिर इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही ताजा लड़ाई में क्यों शामिल नहीं हो रहा है? नवभारत टाइम्स ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कैप्टन श्याम कुमार, जो युद्धपोत के कमांडर रह चुके हैं और अब मिलिट्री एनालिस्ट हैं उनसे खास बात की है। उन्होंने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन को बताया कि असल में अमेरिका आज से नहीं बल्कि कम से कम पांच वर्षों से इस युद्ध की तैयारी कर रहा था। उन्होंने कहा कि ‘अमेरिका का असली मकसद होर्मुज स्ट्रेट ईरान से छीनकर अरब देशों को सौंपना है।’
होर्मुज को अरब देशों के हवाले करना चाहता अमेरिका?
कैप्टन श्याम कुमार ने बताया ‘जो लोग समझते हैं कि ट्रंप ने इस युद्ध को शुरू किया है वो नादामी कर रहे हैं। असल में इस युद्ध की तैयारी बाइडेन प्रशासन के समय ही हो गया था। इसीलिए राष्ट्रपति बनने के ठीक तीन महीने में ही ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमला कर दिया। जून 2025 के युद्ध के बाद अमेरिका को ईरान की ताकत का अहसास हो गया जब ईरान ने इजरायल और कतर में हमले किए। इसीलिए फिर से तैयारी की गई और अब युद्ध शुरू हो गया है।’










































