आठ सूत्रीय मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के मुख्य गेट पर की तालाबंदी

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मूलभूत सुविधाओं परीक्षा परिणाम और छात्रवृत्ति की समस्याओं को लेकर जताया आक्रोश

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर के शासकीय शंकर साव पटेल महाविद्यालय में विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर धरना प्रदर्शन किया। लंबे समय से समस्याओं के समाधान के लिए आवेदन करने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से नाराज विद्यार्थियों ने महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्राचार्य एस एस गेड़ाम को सौंपते हुए समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की।

यह हैं मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार शंकर साव पटेल शासकीय महाविद्यालय वारासिवनी ही नहीं आसपास के क्षेत्र में एक बड़ा महाविद्यालय है। जहां दूर दराज से बड़ी संख्या में विद्यार्थी पब्लिक ट्रांसपोर्ट के माध्यम से शिक्षा अध्ययन करने के लिए आते हैं। ऐसे में इन विद्यार्थियों को बीते लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें काफ ी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं कई बार आर्थिक भार भी ट्रांसपोर्ट का उन पर पड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में महाविद्यालय में मूलभूत सुविधा साफ सफाई पंखे समय पर कक्षाओं का संचालन शुद्ध पानी जैसी विभिन्न समस्याओं को लेकर आवेदन और आंदोलन भी किया गया। परंतु व्यवस्था में सुधार नही होने से आक्रोशित विद्यार्थियों के द्वारा २७ अक्टूबर को महाविद्यालय का मुख्य गेट में तालाबंदी कर धरने पर बैठकर महाविद्यालय प्रशासन हाय हाय सहित अनेक प्रकार के नारे लगाए गए। जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे तो वहीं विद्यार्थी एवं स्टाफ बाहर खड़ा रहा। यह धरना प्रदर्शन करीब १ घंटे चला महाविद्यालय प्राचार्य एस एस गेड़ाम महाविद्यालय स्टाफ के साथ पहुंचे। जिन्हे विद्यार्थियों के द्वारा ज्ञापन देकर विभिन्न विषयों पर चर्चा कर सुधार करने मांग की गई।

विद्यार्थियों ने ज्ञापन में यह रखी मांग

विद्यार्थियों के द्वारा महाविद्यालय प्राचार्य एस एस गेड़ाम से विस्तृत रूप से विभिन्न मांगो पर चर्चा की गई। वहीं पूर्व में दिए गए आश्वासन पर जवाब लेने के उपरांत ज्ञापन दिया गया कि पिछले लंबे समय से छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में डब्लू एच प्रो प्रमोटेड जैसी समस्याओं का सामना बार बार करना पड़ रहा है। क्लियर रिजल्ट को लेकर कॉलेज प्रशासन एवं विश्वविद्यालय से समाधान नहीं होने से छात्र बहुत ज्यादा परेशान है। महाविद्यालय में ओबीसी एसटी एससी छात्र छात्राओं को छात्रवृत्ति समय पर प्राप्त नहीं हो रही है, शिक्षकों के व्यवहार में सुधार नहीं आ रहा है, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है, शौचालय एवं कक्षाओं के नियमित साफ सफाई नहीं की जा रही है, महाविद्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गया है वह चालू नहीं है, कक्षाओं का प्रतिदिन समय अनुसार संचालन नहीं हो रहा है, नवीन पाठ्यक्रम की पुस्तक लाइब्रेरी में नहीं है एवं लाइब्रेरी में बैठने की व्यवस्था ठीक नहीं है। साथ ही कई प्रकार की अनियमितता बरती जा रही है जिससे विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ,इस पर प्राचार्य के द्वारा जल्द सुधार करने और व्यवस्था बनाने का आश्वासन विद्यार्थियों को दिया गया। वहीं महाविद्यालय में जन भागीदारी से काम कर रहे कर्मचारियों के द्वारा सही तरीके से कार्य नहीं किया जाने उनका पुलिस वेरिफि केशन करवाने की चर्चा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

कालेज प्रबंधन के द्वारा विद्यार्थीयों की कोई सुध नही लेता है-सुमेन्द्र बंसोड़

सुमेन्द्र बंसोड़ ने बताया कि कॉलेज प्रशासन को आंदोलन के माध्यम से हमारे द्वारा बताया है कि एसटी एससी ओबीसी के छात्रों की समय पर छात्रवृत्ति नहीं आ रही है। शिक्षकों का व्यवहार ठीक नहीं है शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है ,शौचालय एवं कक्षाओं में साफ सफ ाई नहीं है सीसीटीवी का लगाए हैं वह बंद है जैसी तमाम विषय पर ज्ञापन दिया गया है। वहीं विद्यार्थियों को परीक्षा में पूरक भी बहुत आ रही है जबकि कई महाविद्यालय है पर वारासिवनी महाविद्यालय में यह समस्या ज्यादा है इनमें सुधार होना चाहिए।

कई बार धरना आंदोलन किया फिर भी मूलभूत सुविधा की कमी है-अभिनय डोंगरे

अभिनय डोंगरे ने बताया की महाविद्यालय में कई प्रकार की अनियमित और मूलभूत सुविधा की कमी थी जिसको लेकर कई बार आवेदन दिया गया। पर हर बार आश्वासन दिया उस पर कोई समाधान नहीं किया गया था। इसके तहत विद्यार्थियों के द्वारा तालाबंदी कर आक्रोश व्यक्ति किया गया है । फि ल्टर में कॉकरोच वाला पानी पीना पड़ता है शौचालय में गुटके के पाउच पड़े रहते हैं। बहुत ज्यादा गंदगी है परिसर में बनी हुई है गर्मी के लिए पंखे नहीं लगे हैं । ऐसी कई प्रकार की समस्या है इसके समाधान के लिए हमें यह आंदोलन करना पड़ रहा है।

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