खैरलांजी में छात्रावास बंद होने पर छात्रों का विरोध

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राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय बालक छात्रावास को नियमित रूप से संचालित करने की मांग

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। खैरलाँजी महाविद्यालय में दूर दराज के गांवों से आकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों के सामने संकट के बादल मंडराने लगे हैं। खैरलांजी के राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय महाविद्यालयीन बालक छात्रावास को बंद किए जाने और वहां ताला जड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए छात्रावास को सुचारु रूप से संचालित रखने की पुरजोर मांग उठाई है।

यह है पूरा मामला

वीरंगना रानी अवंतीबाई शासकीय महाविद्यालय में खैरलांजी और कटंगी क्षेत्र के कई दूरस्थ गांवों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें से अधिकांश छात्र ऐसे परिवारों से ताल्लुक रखते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और जो प्रतिदिन गांवों से कॉलेज आना जाना करने में असमर्थ हैं। ये विद्यार्थी छात्रावास में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। जब वे हाल ही में छात्रावास पहुंचे तो उन्हें अधीक्षक के द्वारा यह जानकारी दी गई कि छात्रावास बंद कर दिया गया है और २२ अक्टूबर को इस पर ताला लगा दिया गया है। अचानक हुई इस कार्यवाही से छात्रों के सामने रहने और अपनी पढ़ाई जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया। छात्रों की परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने एकजुट होकर २४ अक्टूबर को जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया। छात्रों की इस पहल के बाद उसी दिन यानी २४ अक्टूबर की शाम को छात्रावास का ताला खोले जाने की अनुमति दी गई। हालांकि ताला खुलने के बाद भी विद्यार्थियों और ग्रामीणों की चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं। उनकी मांग है कि छात्रावास को केवल तात्कालिक रूप से खोलने के बजाय इसका नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई में कोई बाधा ना आए। आगामी शैक्षणिक सत्र से खैरलांजी महाविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू होने की प्रबल संभावना है। यदि पीजी की पढ़ाई शुरू होती है तो महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसी स्थिति में छात्रावास को बंद करने के बजाय इसकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और अधिक से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। जिसको लेकर विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने मांग की हैं की राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय महाविद्यालयीन बालक छात्रावास को स्थायी रूप से संचालित रखा जाए। छात्रावास में दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या और प्रवेश अभिलेखों की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पात्र विद्यार्थियों को आवास की सुविधा सुलभ कराते हुए उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रखने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

अधीक्षक द्वारा कथित रूप से नाम काटकर इस संख्या को घटा दिया – भारत चौरागड़े

ग्रामीण भारत चौरागड़े ने इस मामले में गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि छात्रावास में कुल ४३ विद्यार्थियों का वैध प्रवेश था। लेकिन अधीक्षक द्वारा कथित रूप से नाम काटकर इस संख्या को घटाकर मात्र १९ दर्शा दिया गया। हमें आशंका है कि छात्रावास को बंद करने के नापाक इरादे से जानबूझकर कम संख्या दिखाई गई है। आगामी सत्र में पीजी की पढ़ाई शुरू होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो महाविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में छात्रावास को बंद करने के बजाय उसकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और जरूरतमंद विद्यार्थियों को सुविधा उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

बच्चों के नाम काटे गए और संख्या कम होने के कारण बंद किया जा रहा है – विनोद कावरे

छात्र विनोद कावरे ने बताया कि वह फ ुलचूर के रहने वाले हैं खैरलांजी महाविद्यालय में पढ़ाई करते हैं। हाल ही में छात्रावास से नवरात्र पर्व मनाने के लिए अपने गांव गए हुए थे। जहां से वापस आए तो पता चला कि छात्रावास बंद कर दिया गया है। यहां छात्रावास में ४० बच्चों के नाम दर्ज थे श्री बिसेन के द्वारा बच्चों के नाम काटे गए और संख्या कम होने के कारण इसे बंद किया जा रहा है। इसमें श्री बिसेन का हाथ है हम चाहते हैं कि नया अधीक्षक यहां पर पदस्थ किया जाए। इस संबंध में हम बालाघाट भी गए थे तो उन्होंने तत्काल में इसे चालू कर दिया है हम यही चाहते हैं की सुचारू रूप से यह चालू रहे।

बाइट भारत चौरागड़े ग्रामीण

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