Kuno National Park: चीते इंसानों का करते हैं शिकार? कूनो से निकलकर झोपड़ी में दो बछड़े को खाया लेकिन पास में सो रहे दंपति को नहीं छुआ

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Kuno National Park: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर दो चीते गांवों में पहुंचे। वहां एक झोपड़ी में बंधे दो बछड़ों का शिकार किया है। वही पास में सो रहे दंपति को नहीं छुआ है। ऐसे में सवाल है कि क्या चीते इंसानों का शिकार नहीं करते हैं।श्योपुर: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित एक झोपड़ी में पहुंचकर दो चीतों ने दो बछड़ों का शिकार किया है। उस झोपड़ी में पति-पत्नी भी सो रहे थे लेकिन चीतों ने उन पर हमला नहीं किया है। चीतों का शिकार करता देखकर दोनों वहां से निकल गए हैं। लेकिन सवाल है कि क्या चीते इंसानों का शिकार नहीं करते हैं।चीतों की मौजूदगी से है दहशत

कूनो नेशनल पार्क से निकलकर श्योपुर जिले के एक गांव में दो चीतों ने एक घर के पास दो बछड़ों को मार डाला, जिसके बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों को अब रात में अपने खेतों में जाने से डर लग रहा है।

इंसानों पर हमला नहीं करते

हालांकि, वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ग्रामीणों से न घबराने की अपील करते हुए कहा कि चीते सामान्य तौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। उन्होंने ग्रामीणों से गांवों में चीतों के दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने को कहा।रविवार की सुबह किया था हमला

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह घटना रविवार सुबह करीब पांच बजे करहल तहसील के लहारोनी ग्राम पंचायत के अंतर्गत बामोरी गांव में हुई। यह गांव श्योपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है। रिहायशी इलाके में चीतों द्वारा इस तरह के हमले की यह पहली घटना बताई जा रही है।

बछड़ों के पास सो रहे थे पति-पत्नी

ग्रामीणों ने बताया कि मवेशियों के मालिक सोमला सिंह और उनकी पत्नी पशुशाला के पास खाट पर सो रहे थे। इसी दौरान बछड़ों पर चीतों के हमले की आवाज सुनकर उनकी नींद खुल गई। दंपति ने पास में चीतों को देखा तो घबराकर सुरक्षित स्थान पर भाग गए।
कूनो में चीतों की संख्या है 53

श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 53 चीते हैं, जिनमें भारत में जन्मे 40 चीते भी शामिल हैं। इसके साथ ही गांधी सागर अभ्यारण और नौरादेही में भी चीतों को छोड़ा गया है।

रात में सिंचाई करने नहीं जा रहे

इस घटना के बाद घरों के नजदीक चीतों की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि इन दिनों किसान रबी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं और अक्सर रात में खेतों पर जाते हैं। चीतों की आवाजाही के कारण उन्हें अंधेरे में गांव के रास्तों से गुजरने और खेतों में काम करने में डर लग रहा है।

लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि चीते आम तौर पर इंसानों पर हमला नहीं करते। गांवों में चीते दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचित करें।

उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्ट

चीतों पर चौबीसों घंटे निगरानी

शर्मा ने बताया कि चीतों की निगरानी के लिए एक दल चौबीसों घंटे नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि चीतों द्वारा मवेशियों को मारने के मामलों में नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। गौरतलब है कि कूनो नेशनल पार्क से निकलकर चीते ग्रामीणों क्षेत्रों में पहुंचते हैं। इनका पसंदीदा शिकार बकरी और बछड़ा होता है। वन विभाग मृत मवेशियों के मालिकों को मुआवजा देती है।

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