पीएम मोदी ने कहा- हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए, ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है, यह देश के लोगों के प्रयासों को करीब से समझने और उनके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने की यात्रा है।Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें एपिसोड में देश को संबोधित किया। पीएम मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 12 साल पहले, विजयदशमी के शुभ अवसर पर, हमने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब से हमारी यात्रा निर्बाध रूप से जारी है। आप सभी इस यात्रा में सहयात्री और मार्गदर्शक रहे हैं। मेरे लिए, ‘मन की बात’ हमारे देश के आम आदमी के परिश्रम, साहस, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा भावना का जश्न मनाने का एक शानदार अवसर रहा है। हमारे देश में सदियों से तीर्थयात्रा की परंपरा रही है। मेरे लिए, ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है, यह देश के लोगों के प्रयासों को करीब से समझने और उनके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने की यात्रा है।
पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’
पीएम मोदी ने कहा, पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की एक संस्था ने ऑर्गेनिक फार्मिंग और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया। इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे। इस पहल को नाम दिया गया ‘नव-त्रिन्जन’। इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है। यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है, इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती।टिहरी गढ़वाल में नदी को नया जीवन
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी है ‘हेवल’। कुछ समय पहले, हेवल नदी में पानी कम होने लगा था। आस-पास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया। इस दौरान बारिश का पानी रोकने के उपाय हुए, जमीन में पानी पहुंचाने के लिए काम हुआ और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए। आज इस प्रयास से हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।वोकल फॉर लोकल उत्पाद
‘Vocal for Local’ की भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। कर्नाटका के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने बनाए उत्पादों की packaging पर बहुत focus किया है। यहां ‘शबरी नेचुरल्स’ के जरिए शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप है। इस packaging को जापान का प्रतिष्ठित ‘Good Design Award’ मिला है।e-Sanjeevani के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क
अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात साल के ओहो-ताहाने को तेज बुखार था। सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। ऐसे में लोकल हेल्थ वर्कर्स ने e-Sanjeevani के जरिए एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क किया। उस बच्चे को निमोनिया था और जैसे ही वो एक्सपर्ट डॉक्टर की निगरानी में आया, उसकी स्थिति में तेजी से सुधार होने लगा। लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 साल के कुन्ही कोया जी की तबीयत एक दिन अचानक बिगड़ गई थी। तब समुद्र के उस पार कवरत्ती में बैठे अनुभवी डॉक्टर से e-Sanjeevani के जरिए संपर्क किया गया। उन अनुभवी डॉक्टरों ने लोकल मेडिकल टीम को गाइ़ड किया और कुन्ही कोया जी को राहत पहुंचाई।
‘सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर’
‘सुधा गोपाल कृष्णन ब्रेन सेंटर’ का मैंने IIT Madras में लोकार्पण किया था। इस सेंटर ने एक ब्रेन इमेजिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाया है, जो दुनियाभर के लिए मिसाल है। इसके जरिए मानव मस्तिष्क की हाई रिजोल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार की जा रही है। उनका लक्ष्य है, आने वाले दिनों में 100 ह्यूमन ब्रेन की 3D मैपिंग करके उनका बारीकी से अध्ययन करना।
महान वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी जी की 100वीं जन्म जयंती








































