गर्रा रेलवे ओवरब्रिज की ऊंचाई को लेकर उठे सवाल,

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गर्रा रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज की तकनीकी स्वीकृति और उसकी ऊंचाई को लेकर बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों द्वारा दावा किया जा रहा है कि पुल निर्माण में तकनीकी मानकों और नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है, जिससे भविष्य में भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर चर्चा करने वाले कुछ लोगों का कहना है कि सामान्य तौर पर रेलवे ओवरब्रिज के नीचे भारी वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए लगभग 7.50 मीटर ऊंचाई आवश्यक मानी जाती है। आरोप लगाया जा रहा है कि गर्रा ओवरब्रिज में निर्माण के दौरान केवल करीब 5 मीटर की ऊंचाई ही छोड़ी गई है, जो भविष्य में बड़े और ऊंचे वाहनों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में पर्याप्त ऊंचाई नहीं रखी गई तो आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था और भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और तकनीकी स्वीकृति को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने इन आरोपों को निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ओवरब्रिज का निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत डिजाइन के अनुसार किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक पुल के नीचे छोड़ी गई लगभग 5 मीटर ऊंचाई भारी वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त है और कुछ लोग बिना तथ्य के भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। सरेखा रेलवे ओवरब्रिज से जहां आवागमन शुरू हो चुका है, वहीं भटेरा और गर्रा रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माण कार्य अभी जारी है। इनमें गर्रा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहा ओवरब्रिज अंतिम चरण में पहुंच चुका है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। हालांकि ओवरब्रिज के पूर्ण होने से पहले ही इसकी ऊंचाई को लेकर विवाद और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों और कुछ वाहन चालकों का आरोप है कि ब्रिज निर्माण के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए विद्युत हाईटेंशन तारों के बीच पर्याप्त ऊंचाई नहीं छोड़ी गई। उनका कहना है कि जहां भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन के लिए अधिक ऊंचाई आवश्यक थी, वहां विभाग द्वारा लगभग 5 मीटर की ही ऊंचाई रखी गई है। लोगों का मानना है कि भविष्य में इससे बड़े और ऊंचे वाहनों को निकलने में परेशानी आ सकती है। इसी मुद्दे को लेकर कई लोगों ने मौके के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट में विभागीय अधिकारियों तथा निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों ने कमेंट करते हुए आरोप लगाया कि ब्रिज निर्माण के दौरान तकनीकी स्वीकृति, ड्राइंग और डिजाइन के पहलुओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन कमियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यातायात प्रभावित हो सकता है। सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चाओं और आरोपों के बीच जब इस पूरे मामले को लेकर सेतु विभाग के एसडीओ अर्जुन सिंह सनोडिया से दूरभाष पर चर्चा की गई तो उन्होंने वायरल किए जा रहे दावों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अधूरी और गलत जानकारी के आधार पर सोशल मीडिया में वीडियो और रील बनाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। एसडीओ ने बताया कि वर्तमान में भी डेंजर रोड मार्ग पर गर्रा और नवेगांव की ओर रेलवे के दो अंडरब्रिज मौजूद हैं, जहां भारी वाहनों के लिए केवल 4 मीटर की ऊंचाई उपलब्ध है और वहां से लगातार भारी वाहन गुजर रहे हैं। इसके मुकाबले गर्रा रेलवे ओवरब्रिज में 5 मीटर की ऊंचाई छोड़ी गई है, जो तकनीकी मानकों के अनुरूप है और भारी वाहनों के आवागमन के लिए पर्याप्त मानी गई है।

किसी प्रकार की कोई परेशानी नही होंगी- अर्जुनसिंह

अर्जुन सिंह सनोडिया ने बताया कि ओवरब्रिज निर्माण के दौरान समन्वय समिति की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई थी। इतना ही नहीं, कलेक्टर बालाघाट की मौजूदगी में भी इस पर निर्णय लिया गया था कि गर्रा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ब्रिज में भारी वाहनों के लिए 5 मीटर की ऊंचाई रखी जाएगी, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। अर्जुन सिंह सनोडिया ने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर गलत तथ्यों के साथ वीडियो प्रसारित कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं का दुष्प्रचार कर रहे हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी वास्तविकता और तकनीकी पक्ष को समझना जरूरी है।

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