ग्वालियर। शहर के अलग-अलग इलाकों में सैकड़ों की संख्या में कोचिंग संचालित हो रही हैं, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर आग बुझाने के इंतजाम ही नहीं हैं। शहर की सिर्फ तीन कोचिंग के पास ही नगर निगम से जारी फायर एनओसी है। बाकी संस्थानों में न तो फायर फाइटिंग सिस्टम लगे हैं और न ही अन्य सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
लालच नहीं होने देता कार्रवाई
ये जानकारी नगर निगम के अधिकारियों के पास भी है, लेकिन धन के लालची ऐसे लापरवाह संस्थानों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। देश में कहीं आग लगने की बड़ी घटनाएं होने पर निगम का फायर अमला नींद से जागता है और जांच अभियान शुरू कर देता है, लेकिन दिन बीतने के साथ ही ये अभियान ठंडा पड़ जाता है।अधिकारियों को हादसे का इंतजार!
सोमवार को लखनऊ के अलीगंज इलाके में कोचिंग में लगी आग से 15 छात्रों की मौत हो गई, लेकिन ग्वालियर में अब भी जिम्मेदार अधिकारी ऐसे हादसों का इंतजार कर रहे हैं। ग्वालियर में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान ऐसे भवनों में संचालित हो रहे हैं जहां सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं हो रहा। कई संस्थानों के पास नगर निगम का एनओसी व आवश्यक सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं है। आपातकालीन निकास व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल हैं।
अभिभावक भी सुरक्षा को लेकर लापरवाह
अभिभावक भी आमतौर पर कोचिंग की लोकप्रियता और परिणाम देखकर बच्चों का दाखिला करा देते हैं, लेकिन भवन की सुरक्षा की जांच नहीं करते। इन कोचिंगों में संकरी सीढ़ियां, सीमित निकास मार्ग, लकड़ी के पार्टिशन और भीड़भाड़ किसी दुर्घटना की स्थिति में बड़ा खतरा बन सकते हैं। प्रशासन के पास भी शहर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों का समग्र रिकार्ड नहीं होने की बात सामने आई है।
सिर्फ एक कोचिंग पर हुई थी कार्रवाई, 10 दिन से जांच भी ठप
पिछले दिनों दिल्ली के होटल में आग लगने से कई मौतें होने के बाद नगर निगम के अमले ने शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों, कोचिंग आदि की जांच की थी। इस दौरान सिटी सेंटर स्थित एक कोचिंग में फायर फाइटिंग सिस्टम चालू नहीं मिला, साथ ही एनओसी की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी।
ऐसे में यहां डायरेक्टर कक्ष सील कर फायर फाइटिंग सिस्टम चालू करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कोचिंग प्रबंधन ने एनओसी के लिए आवेदन भी कर दिया। इसी के तहत पिछली कार्रवाई गत 12 जून को टोपी बाजार में पूजा होजरी और मोर बाजार में अनेजा माल पर की गई थी। पिछले 10 दिनों से यह जांच अभियान भी ठप पड़ा हुआ है।










































