भारतीय बाजार का बुरा हाल है। ज्यादातर एक्सपर्ट गिरावट को खरीदारी का मौका बताते हैं। लेकिन, शंकर शर्मा का कहना है कि म्यूचुअल फंड और SIP से भरतीय निवेशकों के दूर रहने में ही भलाई है।Shankar Sharma on SIP : शेयर बाजार में गिरावट के बीच जहां निवेशकों को SIP जारी रखने की सलाह दी जाती है, वहीं दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने इस निवेश रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका मानना है कि म्यूचुअल फंड की सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) भारत के लिए बुनियादी तौर पर गलत प्रोडक्ट है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि SIP निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिले और वे निराश हों, ताकि इस जाल में फंसने से बच सकें।
मिंट को दिए एक इंटरव्यू में GQuant Investech के संस्थापक शर्मा ने शेयर बाजार, रुपये की कमजोरी, महंगाई और विदेशी निवेश को लेकर अपनी अलग राय रखी। उनका तर्क है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों को देखते हुए निवेशकों को केवल इक्विटी बाजार पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
SIP के खिलाफ क्यों हैं शंकर शर्मा?
शर्मा की सबसे बड़ी आपत्ति SIP से जुड़ी रिटर्न की उम्मीदों को लेकर है। उनके मुताबिक, निवेशकों के सामने अक्सर लंबे समय के औसत रिटर्न के आंकड़े रखे जाते हैं, जबकि शेयर बाजार में अच्छे प्रदर्शन के साथ कमजोर रिटर्न वाले दौर भी आते हैं।उन्होंने अपनी ‘Lake of Returns’ थ्योरी का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य भारतीय शेयर सूचकांकों में मध्य-2024 से लगभग पांच साल तक कमजोर रिटर्न का दौर रहने की आशंका है। यह उनका बाजार संबंधी अनुमान है, न कि भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी।
रुपये की कमजोरी और महंगाई का दबाव
शर्मा के मुताबिक, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी ने भारत की आर्थिक मुश्किलें बढ़ाई हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल को बढ़ाता है और कंपनियों की लागत पर दबाव डालता है।
इसका असर आगे चलकर सामान और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उनका मानना है कि घरेलू परिवारों की क्रय शक्ति पर दबाव बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए ऊंचे रिटर्न की उम्मीद करना और मुश्किल हो सकता है।
सरकार को विदेशी निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए?
शर्मा का सबसे विवादास्पद सुझाव यह है कि सरकार को विदेशी निवेशकों पर टैक्स घटाने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों पर टैक्स बढ़ाने जैसे कदमों पर विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि भारत को विदेशी मुद्रा की जरूरत है और विदेशी पूंजी को आकर्षित करना अहम है। उनके मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के दौरान घरेलू म्यूचुअल फंड शेयरों को खरीदते हैं। इससे यह भ्रम बना रहता है कि बाजार में सब ठीक है।
निवेशकों को कहां लगाना चाहिए पैसा?
शर्मा ने फिक्स्ड इनकम, सोना और चुनिंदा रियल एस्टेट निवेश को विकल्पों के रूप में सुझाया है। उनका मानना है कि निवेशकों को अपनी पूरी वित्तीय योजना शेयर बाजार के लगातार बढ़ने की उम्मीद पर नहीं बनानी चाहिए।
हालांकि, इन विकल्पों में भी जोखिम हैं। फिक्स्ड इनकम पर महंगाई का असर पड़ सकता है, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है और रियल एस्टेट में निवेश को नकदी में बदलना आसान नहीं होता।






































