सत्तर के दशक में अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब ममता बनर्जी को दिल्ली में भी बड़ा झटका लगा है। पार्टी के 20 सांसदों ने उन्हें झटका देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की इच्छा जताई है।
काकोली घोष दस्तीदार ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया ति इन सांसदों ने अपने पत्र में कहा है कि वे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के जनादेश को स्वीकार करते हैं और मानते हैं कि उनकी भविष्य की राजनीतिक दिशा NDA के साथ जुड़कर आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों का एक बड़ा समूह अब NDA के साथ राजनीतिक तालमेल बनाने के पक्ष में है।
20 असंतुष्ट सांसदों ने की थी गुप्त बैठक
इससे पहले, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के विपक्षी गठबंधन ’इंडिया’ की बैठक के लिए दिल्ली में मौजूद रहने के बीच असंतुष्ट सांसदों के एक समूह ने बंद कमरे में बैठक की। रविवार देर रात दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर करीब 20 सांसद इस अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। जहां सांसदों ने संभावित रणनीतियों पर चर्चा की और पार्टी की मौजूदा संसदीय नेतृत्व संरचना पर अपनी नाराजगी जताई।तस्वीर आई सामने
बैठक के बारे में जानकारी रखने वाले तृणमूल के एक नेता ने कहा, ’’बैठक मूलत: भविष्य की रणनीतियों पर केंद्रित थी। कई सांसदों ने चिंता जताई कि नेतृत्व पार्टी की चुनावी हार के कारणों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। सोमवार को सोशल मीडिया पर बैठक की एक तस्वीर सामने आई, जिसमें तृणमूल के कई लोकसभा सदस्य एक मेज के इर्द-गिर्द बैठे दिख रहे हैं। हालांकि इस तस्वीर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों का दावा है कि तस्वीर में दिख रहे लोगों से कहीं अधिक, करीब 20 सांसद इस बैठक में शामिल थे।
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बैठक के दौरान उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब एक सांसद ने बिना बताए बैठक की तस्वीरें खींच लीं। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में शामिल कुछ सांसदों ने बिना सहमति के तस्वीरें लेने पर आपत्ति जताई और इसे लेकर वहां मौजूद लोगों के बीच थोड़ी नोकझोंक भी हुई।
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यह दावा ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं पहले से चल रही हैं। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर मतभेदों और अलग गुट बनने की खबरें भी सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पार्टी नेतृत्व अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है और संभावित विभाजन को रोकने के लिए सक्रिय है।










































