Trinamool Congress Internal Crisis 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में शिकस्त मिलने के बाद ममता बनर्जी की ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) के भीतर मची रार अब खुले विद्रोह में बदल चुकी है। पार्टी के भीतर तेजी से फैलती बगावत को रोकने और नियंत्रण वापस पाने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने एक बेहद हैरान करने वाला और बड़ा कदम उठाया है। टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी मुख्य कमेटियों और सभी फ्रंटल संगठनों (महिला, युवा आदि विंग्स) को तत्काल प्रभाव से भंग (Dissolve) कर दिया है।
TMC ने सोशल मीडिया पर किया एलान, कहा- करेंगे आत्मनिरीक्षण
पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस फैसले की आधिकारिक घोषणा करते हुए लिखा, ‘गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों के साथ-साथ इसके सभी फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है। पार्टी अब हर स्तर पर आत्मनिरीक्षण (Introspection), प्रदर्शन की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की एक व्यापक आंतरिक प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके निष्कर्षों के आधार पर ही मूल निकाय और सभी संगठनों का पुनर्गठन कर नई घोषणा की जाएगी।’60 विधायकों ने छोड़ी बैठक, ‘शिवसेना मॉडल’ पर बगावत की तैयारी!
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के भीतर बगावत की आग बहुत तेजी से फैल रही है। हाल ही में कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक को पार्टी के 80 में से करीब 60 विधायकों (MLAs) ने स्किप कर दिया। पार्टी के भीतर यह घमासान विधानसभा में ‘नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) के चुनाव को लेकर शुरू हुआ है। ममता बनर्जी ने अपने करीबी शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष नामित किया है, जिसका पार्टी के विधायकों का एक बड़ा धड़ा पुरजोर विरोध कर रहा है।बागी गुट का दावा है कि उनके पास 80 में से दो-तिहाई विधायकों (करीब 50 से अधिक) का समर्थन है और वे विधानसभा स्पीकर के सामने खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं, ठीक वैसे ही जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ हुआ था।










































