रेत की किल्लत से निर्माण कार्य ठप, ५ हजार मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट

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पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर के वार्ड नंबर ५ स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर परिसर में राजमिस्त्री संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में क्षेत्र में गहराते रेत संकट और उसके कारण लगातार बंद हो रहे निर्माण कार्यों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें जल्द से जल्द व्यवस्था सुचारू करने की मांग की गई है ताकि मजदूरों और ठेकेदारों को राहत मिल सके।

टेंडर ना होने से गहराया संकट

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन द्वारा समय पर रेत घाटों का टेंडर ना किए जाने के कारण क्षेत्र में रेत की भारी किल्लत हो गई है। कानूनी रूप से रेत का उठाव बंद होने से निर्माण कार्य पूरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं। हालांकि वर्तमान में बैलगाडिय़ों के माध्यम से सीमित मात्रा में रेत उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन दूर दराज के इलाकों में इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस संकट के बीच कालाबाजारी की बात भी सामने आ रही है। बैलगाड़ी चालकों या स्थानीय स्तर पर रेत का मूल्य अत्यधिक बढ़ा दिया गया है। आपदा को अवसर बनाकर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं जिसे आम निर्माणकर्ता खरीदने में सक्षम नहीं है। महंगे दामों के कारण ठेकेदारों को मजबूरन अपने काम रोकने पड़ रहे हैं।

५००० से अधिक मजदूरों पर आर्थिक संकट, पलायन को मजबूर

वारासिवनी विकासखंड के अंतर्गत लगभग २०० से अधिक बड़े ठेकेदार सक्रिय हैं जिनके अधीन लगभग ५००० से अधिक मजदूर और राजमिस्त्री दैनिक मजदूरी पर कार्य करते हैं। रेत ना मिलने से काम बंद हो गया है जिससे एक बहुत बड़े वर्ग के सामने भरण पोषण और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। काम ना मिलने के कारण कई मजदूर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं जिसका सीधा असर उनके परिवारों के लालन पालन पर पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि कई श्रमिक काम की तलाश में अन्य क्षेत्रों में पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

बारिश सिर पर, लंबे समय तक काम ठप रहने की आशंका

ठेकेदारों और निर्माणकर्ताओं में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा डर है कि आगामी कुछ दिनों में मानसून बारिश का मौसम शुरू होने वाला है। बारिश लगते ही नियमों के तहत रेत घाटों पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जाएगा। ऐसे में यदि बारिश से पहले प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की तो यह निर्माण कार्य लंबे समय के लिए पूरी तरह ठप हो जाएंगे। बेरोजगार हो चुके मजदूर आगामी दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों खेती किसानी से जुड़ जाएंगे जिससे निर्माण क्षेत्र को दोबारा पटरी पर लाना और भी मुश्किल हो जाएगा। राजमिस्त्री संगठन और स्थानीय ठेकेदारों ने शासन प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि यथाशीघ्र रेत घाटों का वैधानिक टेंडर कराया जाये, जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक निर्माण कार्यों को सुचारू रखने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक सरकारी व्यवस्था बनाई जाए। इस दौरान राजमिस्त्री संगठन के पदाधिकारी ठेकेदार और बड़ी संख्या में श्रमिक व सदस्य उपस्थित रहे जिन्होंने एक सुर में प्रशासन से इस समस्या का जल्द से जल्द निराकरण करने की अपील की है।

काम बंद होने से श्रमिक और हमारे मजदूर पलायन कर रहे है-भवानी प्रसाद भगत

राजमिस्त्री संघ के अध्यक्ष भवानी प्रसाद भगत ने बताया कि रेत का टेंडर ना होने से ट्रैक्टर से रेट नहीं मिल रही। बैलगाड़ी से आ रही है किंतु वह दूर क्षेत्र में नहीं जा रही ४०० रूपये बैलगाड़ी बता रहे हैं जो महंगी है। हम काम नहीं कर पा रहे हैं मकान मालिक तो परेशान है हम भी परेशान है कि काम बंद हो रहा है। अपने श्रमिकों को हम पर्याप्त काम नहीं दे पा रहे हैं यह स्थिति २ महीने से चल रही है। अभी अंतिम स्थिति आ गई है केवल सक्रिय श्रमिक हमने चालू रखे हैं बाकी श्रमिक घर बैठे हैं। हम चाहते हैं की रेत का निर्धारित रेट हो जल्द मिले शासन टेंडर करवायें। बैलगाड़ी वाले मनचाहा रुपया मांग रहे हैं इसमें नुकसान मकान मालिक का है परंतु काम बंद होने से श्रमिक का भी है हमारे मजदूर पलायन कर रहे हैं।

प्रशासन को रेत का टेंडर यथाशीघ्र करवाना चाहिए लोगों के कार्य बाधित ना हो-संतोष मदनकर

संतोष मदनकर ने बताया कि मेरे पास चार साइड है रेत के अभाव में एक चालू तीन बंद है तो मजदूर हमारे घर बैठ गए हैं। वह पलायन कर नागपुर रायपुर जा रहे हैं बाहर रोजगार ढूंढ रहे हैं शासन को इस पर ध्यान देना चाहिए और परेशानी का निराकरण करना चाहिए। मकान मालिक मजबूर है एक बैलगाड़ी में १५ घमेला रेत आती है वह ५०० में कोई नहीं खरीदेगा। अब हम कैसे काम करें मजदूर हमें पूछते हैं काम पर आए क्या वह लोग घर बैठे हैं हमने उन्हें एडवांस तो दिया है परंतु वह भी कब तक चलेगा खाने पीने की समस्या तो उनके पास है। क्योंकि मजदूरी इकलौता उनका जीवन निर्वाह करने का साधन है रेत की समस्या ने उन्हें अपने घर में बैठा दिया है। अभी क्षेत्र में करीब २०० से अधिक ठेकेदार है जिनके पास ५००० से अधिक मजदूर काम करते हैं। प्रशासन को रेत का टेंडर यथाशीघ्र करवाना चाहिए ताकि लोगों के कार्य बाधित ना हो।

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