सुहागिनों ने निर्जला व्रत धारण कर की अखंड सौभाग्य की कामना
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में २९ अक्टूबर को सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना के साथ करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास से मनाया। इस अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर विधि विधान से करवा माता और भगवान गणेश की पूजा अर्चना की। शाम को करवा चौथ की कथा का श्रवण करने के बाद चंद्रदेव के दर्शन किए और अघ्र्य अर्पित कर अपने पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया। पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुहागिनों ने सोलह शृंगार कर पूजा की और अपने वैवाहिक जीवन की सुख समृद्धि तथा पति की लंबी आयु की कामना की।
रामदेव बाबा मंदिर में २६ वें वर्ष भी हुआ सामूहिक पूजन
नगर के वार्ड क्रमांक ६ स्थित लालबर्रा रोड़ के रामदेव बाबा मंदिर में प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी २६ वें वर्ष सामूहिक करवा चौथ महोत्सव का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने सहभागिता करते हुए करवा माता और भगवान गणेश की पूजा अर्चना की तथा अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना की। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने सर्वप्रथम पूजन सामग्री सजाकर विधि विधान से पूजा की। इसके बाद करवा चौथ की धार्मिक कथा का पाठ किया गया और पारंपरिक करवा चौथ गीत गाए गए। पूजा के दौरान महिलाओं ने एक दूसरे को पूजा की थाली देकर परिक्रमा की परंपरा का निर्वहन किया। सामूहिक पूजन के माध्यम से महिलाओं ने धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता का परिचय दिया। करवा चौथ के अवसर पर सुबह से ही महिलाओं में उत्साह बना रहा। परंपरा के अनुसार सास द्वारा बहुओं को सरगी प्रदान की गई जिसके बाद महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को सोलह शृंगार कर पूजा अर्चना की गई। चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव के दर्शन कर अघ्र्य अर्पित किया गया और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया गया। रामदेव बाबा मंदिर में लगातार २६ वर्षों से सामूहिक करवा चौथ महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में नगर सहित आसपास के क्षेत्रों की महिलाएं शामिल होकर सामूहिक रूप से पूजन किया।
चंद्र दर्शन के बाद विधि विधान से किया व्रत का पारण
करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व रखता है। मान्यता के अनुसार महिलाएं कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पति की लंबी आयु सुख समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। दिनभर उपवास रखने के पश्चात शाम को करवा माता की पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। इसके बाद चंद्रमा के उदय होने पर छलनी से चंद्र दर्शन कर अघ्र्य अर्पित किया जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं छलनी से पति का चेहरा देखकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल और मिठाई खिलाकर व्रत का पारण कराते हैं। नगर में भी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा का पालन किया। घरों और मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ करवा चौथ की कथा का श्रवण किया गया। चंद्र दर्शन के समय महिलाओं ने परिवार की सुख शांति, समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम एवं विश्वास बनाए रखने की प्रार्थना की।
करवा देवी की कथा से जुड़ी है व्रत की धार्मिक मान्यता
करवा चौथ से जुड़ी पौराणिक कथाएं इस पर्व की धार्मिक महत्ता को दर्शाती हैं। प्रचलित कथा के अनुसार करवा नामक पतिव्रता महिला अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के समीप रहती थीं। एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए तभी एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया। संकट में फं से पति की आवाज सुनकर करवा देवी नदी के तट पर पहुंचीं और अपने पति की रक्षा के लिए प्रयास किया। कथा के अनुसार करवा देवी के पतिव्रत धर्म, दृढ़ संकल्प और साहस के कारण उनके पति के प्राणों की रक्षा हुई। इस कथा को पति के प्रति समर्पण, विश्वास और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसी धार्मिक आस्था के साथ महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।










































