बालाघाट में कांग्रेस महिला उत्पीड़न प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष मधु गजभिए द्वारा पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामकुमार नगपुरे के खिलाफ कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद अब इस मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शिकायत के आधार पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद 24 जून को रामकुमार नगपुरे ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी बात मीडिया के सामने रखी और अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया। प्रेस वार्ता में रामकुमार नगपुरे ने कहा कि उनके खिलाफ जिस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह पूरी तरह एकतरफा हैं और मामले के सभी पहलुओं को सामने नहीं लाया गया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने संबंधित महिला पदाधिकारी को पैसों के लेनदेन के संबंध में फोन किया था। उनके अनुसार जो ऑडियो रिकॉर्डिंग और बातचीत के अंश सार्वजनिक किए जा रहे हैं, उनमें पैसों को लेकर हुई चर्चा को छिपाया गया है और केवल उनके खिलाफ आरोपों को प्रमुखता दी जा रही है।
रामकुमार नगपुरे का कहना है कि फोन पर अभद्र भाषा का प्रयोग सबसे पहले उनकी ओर से नहीं किया गया था। उन्होंने दावा किया कि पहले उन्हें अपशब्द कहे गए, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को निष्पक्ष रूप से देखा जाना चाहिए और केवल एक पक्ष की बात के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से उनकी छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने और उनके सार्वजनिक जीवन को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से यह पूरा मामला खड़ा किया गया है। उन्होंने कहा कि यह किसी विपक्षी दल की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर के कुछ लोगों की साजिश हो सकती है, जो उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करना चाहते हैं। रामकुमार नगपुरे ने कहा कि पिछले वर्षों में हुए जनपद पंचायत चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था, जबकि उस चुनाव में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। इसके बावजूद कुछ लोग अब उस हार का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि उनसे पैसों की मांग की गई थी और जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तब उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। उन्होंने मधु गजभिए पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि वे स्वयं कई लोगों को प्रताड़ित करती हैं और पार्टी नेतृत्व को ऐसे मामलों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है और वह कानून का सम्मान करते हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, वही सच्चाई को उजागर करेंगे। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं, तो दूसरी ओर रामकुमार नगपुरे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।










































