दिलजीत दोसांझ ने दिल्ली कॉन्सर्ट में कहा, “पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ।” उनके इस बयान को छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई पुरानी टिप्पणी से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके ने दिलजीत के नाम भावुक पत्र लिखते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि एक असहमति के बावजूद दिलजीत के लिए उनका सम्मान और प्रशंसा बरकरार है।Diljit Dosanjh: पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने अपने दिल्ली कॉन्सर्ट के दौरान कुछ ऐसा कहा, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। दरअसल, सिंगर ने कॉन्सर्ट के दौरान कहा,”पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ।” दिलजीत के इस बयान पर लोगों ने जमकर तालियां बजाई। इसके बाद उन्होंने सभी के लिए अपना प्यार जाहिर करते हुए कहा, ‘आई लव यू ऑल।’
दरअसल, माना जा रहा है कि दिलजीत ने यह बात कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके को लेकर कहा है। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की लीडरशिप में छात्र प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शन के दौरान दिलजीत से पूछा गया कि क्या वह छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होंगे या इस पर अपनी राय रखेंगे।
अभिजीत दिपके ने दिलजीत से मांगी माफी
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था, ‘मुझे इन सब चीजों से दूर रखो। भाई, मैं एक कलाकार हूं, कोई नेता नहीं हूं।’उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने उनकी टिप्पणी को एक अहम मुद्दे पर चुप्पी साधने के तौर पर देखा और उनकी आलोचना की थी। हालांकि दिलजीत के बयान सामने आने के बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने उनसे माफी मांग है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए दिपके ने लिखा, “दिलजीत पाजी के नाम, पाजी, जून में जब हम विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब आपकी एक टिप्पणी से मुझे थोड़ा दुख हुआ था। ऐसा नहीं था कि मेरे मन में आपके लिए कोई निजी नाराजगी थी, बल्कि इसलिए क्योंकि मैंने हमेशा आपको ऐसे इंसान के रूप में देखा है, जो उन मुद्दों के लिए आवाज उठाता है, जिनके लिए वह खुद खड़ा होता है। ठीक वैसा ही, जैसा आपने खुद कहा था।”
उन्होंने आगे लिखा कि सच कहूं तो मैं हमेशा से आपका प्रशंसक रहा हूं और आज भी हूं। मैं आज भी आपके गाने सुनता हूं। दरअसल, मई में भारत लौटने से ठीक पहले मैं शिकागो में आपका कॉन्सर्ट देखने भी आया था। वहां सिर्फ आपका संगीत सुनने नहीं, बल्कि इसलिए भी आया था क्योंकि मैं हमेशा उस इंसान की बहुत इज्जत करता हूं, जो आप हैं। आपका साहस, आपकी सच्चाई और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का आपका अंदाज, ये ऐसी बातें हैं जिनकी मैं हमेशा से तारीफ करता आया हूं। शायद इसीलिए आपकी उस टिप्पणी से मुझे थोड़ा दुख हुआ था, क्योंकि मैं हमेशा आपको बहुत ऊंचे सम्मान की नजर से देखता आया हूं। लेकिन एक असहमति या गलतफहमी से आपके लिए मेरा सम्मान और प्रशंसा कम नहीं हो जाती। बाकी पाजी, छोटे भाई को समझकर माफ क










































