दमोह मॉडल कांग्रेस की उम्मीद, भाजपा के लिए चुनौती अपार

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मध्य प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव कोरोना संकट के बीच ही होंगे। यह संकट भाजपा के लिए बड़ी चुनौती की तरह है। शिवराज सरकार के फिर से सत्ता में लौटने के समय से ही कोरोना की चुनौती के कारण बड़ी उपलब्धि जनता के बीच ले जाने की स्थिति नहीं है। वहीं, दमोह उपचुनाव में सफलता से उत्साहित कांग्रेस इसी मॉडल पर बाकी के उपचुनाव भी लड़ेगी। अगले विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले यह उपचुनाव प्रदेश में सत्ता के सेमीफाइनल की तरह हैं। इसे लेकर भाजपा में चिंतन का दौर जारी है। कांग्रेस की रणनीति यह है कि जनता से सीधे संवाद के माध्यम से उसने दमोह उपचुनाव जीता था। इसी पैटर्न को आने वाले उपचुनावों में भी लागू किया जाएगा। चारों उपचुनाव प्रदेश के चार अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करेंगे, इसलिए इसके नतीजों से जनता का रुख स्पष्ट हो जाएगा।

चारों उपचुनाव भाजपा के लिए अवसर हैं कि वह जनता के सामने अपनी बात कह सकें।भाजपा सरकार का काम परखा हुआ और खरा है। हम सभी उपचुनाव बहुमत से जीतेंगे। – रजनीश अग्रवाल, प्रदेश मंत्री, भाजपा

भाजपा के लिए किस सीट पर कैसी है चुनौती

जोबट : यह विस सीट आदिवासी बहुल है। 2018 के चुनाव में यह वर्ग भाजपा से नाराज रहा था। इस वर्ग का विश्वास जीतना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इस वर्ग को अपने समर्थन में लाने के लिए हाल ही में वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति की गई है।

रैगांव : विंध्य क्षेत्र की इस सीट पर अजा वर्ग के मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है।

पृथ्वीपुर : बुंदेलखंड क्षेत्र की इस सीट पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग का दबदबा है। आर्थिक असमानता बड़ी समस्या है। कांग्रेस यहां से आगे रही है।

खंडवा : निमाड़ की इस लोस सीट के लिए कांग्रेस से अरुण यादव की दावेदारी है। अर्चना चिटनीस, कृष्णमुरारी मोघे और कैलाश विजयवर्गीय की दावेदारी से भाजपा में असमंजस है। राजपाल सिंह तोमर के नाम पर भी मंथन चल रहा है।

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