दिल्ली होटल अग्निकांड: कैसे मौत का कुआं बना मालवीय नगर का ‘Flourish Stay’? पीड़ितों के अंदर फंसे रहने की 5 खौफनाक वजहें

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Delhi Malviya Nagar Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में बुधवार सुबह करीब 8.40 बजे ‘फ्लरिश स्टे’ (Flourish Stay) बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल में लगी आग ने 21 मासूम जिंदगियों को छीन लिया। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि नियमों की धज्जियां उड़ाकर खड़ी की गई ‘मौत की इमारत’ थी। पूरी तरह सील बंद खिड़कियां, डिजिटल लॉक और केवल एक ही निकास द्वार होने के कारण यह 5 मंजिला इमारत एक गैस चैंबर में तब्दील हो गई थी, जिससे लोग चाहकर भी बाहर नहीं भाग सके।

खौफनाक हादसे को लेकर 5 सबसे बड़े खुलासे

1. 6 कमरों की इजाजत थी, अवैध रूप से बना दिए 26 कमरे

इस होटल के पास दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (B&B) योजना के तहत केवल 6 कमरों को संचालित करने का लाइसेंस था। लेकिन लालच में आकर मालिक ने बेसमेंट और छत को मिलाकर पूरी इमारत में 26 कमरे बना दिए थे। नियमों के मुताबिक, इस पूरी इमारत का न तो कोई स्वीकृत बिल्डिंग प्लान था और न ही इसके पास दमकल विभाग का फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) था।

2. ग्राउंड फ्लोर पर अवैध रेस्टोरेंट, वहीं से भड़की आग

इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर प्रशासन की ओर से सिर्फ चाय और नाश्ते की दुकान चलाने की अनुमति थी। इसके बावजूद, वहां नियमों के खिलाफ एक पूरा रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था। दिल्ली फायर सर्विस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आग की शुरुआत इसी ग्राउंड फ्लोर पर सीढ़ियों के पास रखे सामान या रेस्टोरेंट से हुई, जिसने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।3. सिर्फ एक रास्ता, बेसमेंट का आपातकालीन गेट था बंद

पूरी 5 मंजिला इमारत में आने-जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य सीढ़ी और संकरा रास्ता था। बेसमेंट से बाहर निकलने के लिए एक अलग से एग्जिट गेट बनाया तो गया था, लेकिन वह हमेशा के लिए बंद (शटर गिरा हुआ) रहता था। ऐसे में जब आग लगी, तो सीढ़ियों का इकलौता रास्ता बंद हो गया और लोगों के पास भागने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा।

4. सीढ़ियों में भरा जहरीला धुआं और डिजिटल लॉक बने आफत

चूंकि आग ग्राउंड फ्लोर की सीढ़ियों के पास लगी थी, इसलिए भयंकर और गाढ़ा जहरीला धुआं पूरी सीढ़ी के रास्ते ऊपर की मंजिलों की तरफ फैल गया। इससे ऊपर की मंजिलों और बेसमेंट में सो रहे मेहमानों का दम घुटने लगा। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने बताया कि कमरों के दरवाजों पर डिजिटल लॉक लगे थे। धुआं और बिजली कटने के कारण कई लोग पैनिक में उन डिजिटल दरवाजों को खोल ही नहीं पाए और कमरों के अंदर ही कैद रह गए।

5. चारों तरफ से सील थी इमारत, ‘शाफ्ट’ की तरह फैली आग

चीफ फायर ऑफिसर (DFS साउथ जोन) ए.के. मलिक ने बताया कि यह पूरी इमारत चारों तरफ से पूरी तरह सील थी और एक ‘शाफ्ट’ की तरह काम कर रही थी। इमारत के सामने की तरफ एक बड़ा फेसाड (ग्लास एलिवेशन) लगा था और सभी खिड़कियां पूरी तरह से जाम (सील) थीं। वेंटिलेशन (हवा आने-जाने का रास्ता) न होने के कारण धुआं बाहर नहीं निकल पाया और आग पूरी बिल्डिंग में तेजी से ऊपर की ओर फैलती चली गई।

अपनों के इलाज के लिए दिल्ली आए थे विदेशी और भारतीय नागरिक

इस हादसे की सबसे दुखद बात यह है कि जान गंवाने वाले 21 लोगों में ज्यादातर विदेशी नागरिक (मुख्य रूप से मध्य एशियाई और अफ्रीकी देशों से) शामिल थे। ये लोग अपने परिजनों का इलाज कराने पास के ही मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल आए थे और इसी होटल में ठहरे हुए थे। इसके अलावा मृतकों में भारत के 9 लोग शामिल हैं, जिनमें से 8 लोग गुरुग्राम के एक ही बड़े परिवार के थे, जो अपने बुजुर्ग रिश्तेदार को अस्पताल में देखने आए थे।

स्थानीय लोग बने मसीहा, गद्दे बिछाकर बचाई जान

जब आग लगी, तो चीख-पुकार मच गई. फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने नीचे संकरी गली में दुकानों से गद्दे लाकर बिछा दिए। इसके बाद करीब 9 से 10 लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे छलांग लगाई और उनकी जान बच सकी। एक दिल दहला देने वाले वाकये में, एक मां ने अपनी जान बचाने के लिए अपने मासूम बच्चे को छाती से कसकर चिपकाया और तीसरी मंजिल से नीचे बिछे गद्दे पर कूद गई, दोनों की जान बच गई है।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई: होटल मालिक गिरफ्तार

हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए होटल के मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इससे पहले लवकेश और उसकी पत्नी के खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया था, जिसके बाद उसे धर-दबोचा गया। जहां अब साकेट कोर्ट ने बजाज को चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है।

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