बदलीनुमा मौसम से दीये और मूर्तियां बनाने का कार्य हो रहा प्रभावित
चाइनीज दीयों पर प्रतिबंध लगाने एवं मिट्टी खदान उपलब्ध करवाने की उठी मांग
पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। दीपों का पावन पर्व दीपावली हिंदू धर्मावलंबियों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है, जिसकी तैयारियां पूरे क्षेत्र में जोरों पर चल रही हैं। इसी क्रम में नगर मुख्यालय स्थित कुम्हारी मोहल्ला और ग्राम पंचायत पांढरवानी-लालबर्रा, अमोली में पारंपरिक कुम्हारों व मूर्तिकारों द्वारा तेजी से चाक घुमाकर विविध आकृतियों के दीयों का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए माँ लक्ष्मी की छोटी-छोटी आकर्षक प्रतिमाएं भी बनाई जा रही हैं, जिन्हें एक-दो दिवस में बिक्री के लिए बाजार में लाया जायेगा। वहीं दीपावली पर्व नजदीक आते ही कुम्हारों व मूर्तिकारों के द्वारा युध्द स्तर पर दीये व मूर्ति बनाने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन मौसम की बेरूखी, मिट्टी खदान उपलब्ध नही होने से महंगे दामों में मिट्टी खरीदी कार्य अपने पुस्तैनी कार्य को करने में लगे है। साथ ही बढ़ती महंगाई के कारण उन्हे कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम की बेरूखी और महंगाई से बढ़ी मुश्किलें
आपकों बता दे कि दीपोत्सव पर्व नजदीक आते ही सभी हिन्दु धर्मालंबी खासा उत्साहित नजर आ रहे है। इसी तरह कुम्हारों के परिवार पर्व को लेकर उत्साह में है। वहीं दुसरी तरफ मौसम की बेरूखी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बे-मौसम छाये बादलों और बदलीनुमा मौसम के कारण मिट्टी के दीयों और मूर्तियों को सुखाने में उन्हे भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर मिट्टी की खदान उपलब्ध न होने के कारण कुम्हारों को दूर-दराज से महंगे दामों में मिट्टी मंगवानी पड़ रही है। महंगाई के इस दौर में पुस्तैनी कार्य को बचाये रखना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। मूर्तिकारों का कहना है कि वे जितनी कड़ी मेहनत करते हैं, उस हिसाब से उन्हें दीयों और मूर्तियों के उचित दाम नहीं मिल पाते हैं। वहीं कुम्हारों व मूर्तिकारों का आरोप है कि वे लंबे समय से शासन-प्रशासन से मिट्टी खदान उपलब्ध करवाने और शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारों द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस कारण से प्रशासन के प्रति सभी कुम्हारों में रोष व्याप्त है। वहीं कुम्हारों ने प्रशासन से मांग की है कि मिट्टी खदान, शासन की अन्य योजनाओं का लाभ एवं लंबित मांगों को पूरा करवाने की गुहार लगाई है।
चाइनीज उत्पादों का असर और जनता से अपील
आधुनिकता के इस दौर में बाजार में चाइनीज दीयों और फैंसी आइटम्स का चलन बढऩे से मिट्टी के दीयों की बिक्री पर विपरीत असर पड़ा है। कुम्हारों ने बताया कि पहले लोग एक साथ तीन-चार दर्जन दीये खरीदते थे परंतु बढ़ती महंगाई और तेल के दामों में उछाल के कारण अब लोग कम मात्रा में दीये खरीद रहे हैं। जिससे उनके पुस्तैनी कार्य प्रभावित हो रहे है। स्थानीय कुम्हारों ने सभी हिंदू धर्मावलंबियों से अपील की है कि वे चाइनीज सामानों व दीयों का पूरी तरह बहिष्कार करें तथा स्वदेशी और पारंपरिक मिट्टी के दीयों का ही उपयोग करें। ताकि इन गरीब कुम्हारों का पुस्तैनी व्यवसाय जीवित रह सके और वे भी अपने परिवार के साथ रोशनी का यह पर्व खुशी से मना सकें।






































