दीवारों से कूदकर मजदूरों ने बचाई जान, पिपरटोला रेलवे क्रासिंग के समीप की घटना,
छत का स्लैब डालने के दौरान तेज आवाज के साथ धराशायी हुआ निर्माण,
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी बिल्डिंग के निर्माण पर उठे गंभीर सवाल,
हादसे के बाद दो जेसीबी से मलबा हटाकर समतल कराया स्थल
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बनाए जा रहे भवन की नींव ही सवालों के घेरे में आ गई है। बालाघाट रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर पिपरटोला रेलवे क्रासिंग पर आटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग गेट के संचालन के लिए निर्माणाधीन बिल्डिंग शनिवार को अचानक भरभराकर गिर गई। छत का स्लैब लगाने के दौरान तेज आवाज के साथ पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद मजदूर दीवारों और स्लैब से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे, अन्यथा यह हादसा कई जिंदगियां निगल सकता था।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इस घटना ने रेलवे से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस समय बिल्डिंग गिरने की घटना हुई, उस समय मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी अथवा निर्माण कार्य की निगरानी करने वाला व्यक्ति मौजूद नहीं था। हादसे के बाद जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई, जब बिना किसी जांच-पड़ताल के दो जेसीबी बुलाकर घटनास्थल को समतल कराने का काम शुरू कर दिया गया।
हादसे के बाद मचा हड़कंप, मलबा हटाने में जुटीं दो जेसीबी
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब एक बजे निर्माणाधीन बिल्डिंग अचानक धराशायी हुई। उस समय छत ढालने के लिए स्लैब लगाने का काम चल रहा था। घटना की जानकारी मजदूरों द्वारा निर्माणदायी कंपनी और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को दी गई, जिसके बाद हड़कंप मच गया।उधर सूचना मिलने पर ठेकेदार और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। लेकिन घटनास्थल का निरीक्षण और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने के बजाय दो जेसीबी बुलाकर मलबा हटाने और जमीन को समतल कराने का काम शुरू कर दिया गया। देर शाम तक घटनास्थल को समतल कराने की कार्रवाई जारी रही।ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके निर्देश पर घटनास्थल को समतल कराया गया? क्या बिल्डिंग गिरने के कारणों की जांच किए बिना मलबा हटाना उचित था? कहीं इस जल्दबाजी में निर्माण की खामियों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य तो नष्ट नहीं हो गए?
चार कमरों की बन रही थी बिल्डिंग, एक में बैठता गेटकीपर
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिपरटोला रेलवे क्रासिंग पर आटोमेटिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग गेट के संचालन के लिए चार कमरों की बिल्डिंग बनाई जा रही थी। इनमें एक कमरा गेटकीपर के बैठने के लिए निर्धारित था, जबकि शेष तीन कमरों में गेट के संचालन से संबंधित मशीनें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखे जाने थे।रेलवे क्रासिंग पर सुरक्षा और गेट संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण व्यवस्था के लिए तैयार हो रहे इस भवन का निर्माण ही सवालों के घेरे में आ गया है। यदि निर्माण के दौरान ही भवन की स्थिति ऐसी रही, तो भविष्य में यहां स्थापित होने वाले उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
दोपहर में अधिकांश मजदूर खाना खाने गए थे, इसलिए टला बड़ा हादसा
नाम और पहचान उजागर न करने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि हादसे के समय दोपहर होने के कारण अधिकांश मजदूर खाना खाने गए हुए थे। जो मजदूर मौके पर मौजूद थे, उन्होंने बिल्डिंग गिरते देख दीवारों से कूदकर अपनी जान बचाई। घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है।मजदूरों की सूझबूझ और संयोगवश कम संख्या में लोगों की मौजूदगी के चलते एक बड़ा हादसा टल गया। यदि घटना के समय सभी मजदूर भवन के भीतर या छत पर मौजूद होते, तो जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
निर्माण से पहले मिट्टी की जांच हुई थी या नहीं, जिम्मेदार मौन
बिल्डिंग गिरने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खड़ा हो रहा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि छत का स्लैब लगाने के दौरान ही पूरा भवन धराशायी हो गया? क्या निर्माण के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया गया था? निर्माण शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच कराई गई थी या नहीं? यदि जांच हुई थी, तो किस एजेंसी अथवा अधिकारी ने की थी और उसकी रिपोर्ट में क्या उल्लेख था? वही निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता, भवन की नींव, दीवारों की मजबूती और स्लैब लगाने के दौरान अपनाई गई तकनीकी प्रक्रिया की जांच होना जरूरी है। लेकिन इन सवालों पर संबंधित जिम्मेदारों की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला, निष्पक्ष जांच जरूरी
पिपरटोला रेलवे क्रासिंग पर हुई यह घटना केवल एक निर्माणाधीन भवन के गिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी का गंभीर मामला है। जिस भवन में भविष्य में रेलवे क्रासिंग के संचालन से संबंधित मशीनें और उपकरण रखे जाने थे, उसका निर्माण के दौरान ही गिर जाना कई सवाल खड़े करता है।अब आवश्यकता है कि संबंधित विभाग द्वारा पूरे मामले की तकनीकी जांच कराए। निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, मिट्टी परीक्षण, डिजाइन, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जांच से पहले घटनास्थल को समतल कराने के निर्देश किसने दिए और इसके पीछे क्या कारण थे।बड़ा सवाल यह है कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बन रही बिल्डिंग ही यदि निर्माण के दौरान सुरक्षित नहीं रह सकी, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? बहरहाल इस मामले में रेलवे की जिम्मेदार अधिकारियों या फिर ठेकेदार का कोई बयान सामने नहीं आया है।










































