बालाघाट
उपनगरीय बूढी (बालाघाट) में संचालित नामदान केंद्र में संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में एक दहेज-मुक्त विवाह सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इस दौरान भगत बेनीराम दास तुमड़ीटोला वारासिवनी एवं भक्तमति भोजकुमारी दासी खैरागढ़, छत्तीसगढ़ निवासी वैवाहिक बंधन में बंधे।
शादी, भले ही एक छोटा सा शब्द हो, लेकिन प्रचलित परंपराओं और सामाजिक मान्यताओं के कारण इसे अत्यधिक जटिल बना दिया गया है। वास्तव में, विवाह दो आत्माओं का पवित्र मिलन होता है, जिसे सरल और सहज तरीके से भी संपन्न किया जा सकता है।
इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए संत रामपाल जी महाराज द्वारा विवाह की जटिल प्रक्रिया को सरल स्वरूप दिया गया है। उनके अनुयायियों के बीच “रमैनी” के माध्यम से मात्र 17 मिनट में विवाह संपन्न कराया जाता है, जिसमें किसी प्रकार का आडंबर नहीं होता।
इस विवाह की विशेषता यह रही कि इसमें न बैंड-बाजा था, न घोड़ी और न ही बारात निकाली गई। साथ ही, दहेज का कोई लेन-देन भी नहीं हुआ। पूरी विवाह प्रक्रिया देवी-देवताओं को साक्षी मानकर सादगीपूर्ण वातावरण में पूर्ण की गई।
अक्सर देखा जाता है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में बेटी के विवाह को लेकर चिंता बनी रहती है। एक पिता अपनी बेटी के विवाह हेतु समाज के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं करने का प्रयास करता है, जिसके कारण वह कई बार कर्ज के बोझ तले दब जाता है। दहेज प्रथा के कारण समाज में असमानता भी बढ़ती जा रही है और अनेक बेटियां इस कुरीति का शिकार होती हैं।
वर्तमान समय में, जहां विवाह समारोहों में अत्यधिक खर्च किया जाता है, वहीं संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी उनके विचारों से प्रेरित होकर सादगीपूर्ण और दहेज-मुक्त विवाह को बढ़ावा दे रहे हैं। यह विवाह भी उसी दिशा में एक उदाहरण रहा, जिसमें बिना किसी अनावश्यक खर्च और आडंबर के संपूर्ण रस्में मात्र 17 मिनट में पूरी की गईं।










































