बालाघाट। सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) भरतसिंह चौहान एवं उनकी पत्नी राजश्री चौहान के खिलाफ पन्ना जिले के थाना मण्डला में दर्ज प्रकरण को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में जिला पुलिस पेंशनर्स संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक, के नाम ज्ञापन पुलिस अधीक्षक बालाघाट के माध्यम से सौंपा है। संघ ने प्रकरण को निराधार बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने और संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
संघ से पदाधिकारियो के अनुसार 7 अप्रैल 2026 को चौहान दंपत्ति अपनी निजी कार से पन्ना-छतरपुर मार्ग से गुजर रहे थे, इसी दौरान थाना मण्डला क्षेत्र में वाहन चेकिंग के नाम पर उन्हें रोका गया। आरोप है कि मौके पर मौजूद आरक्षक द्वारा बिना पर्याप्त अधिकार के चेकिंग करते हुए दंपत्ति के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। संघ ने दावा किया कि घटना के वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि दंपत्ति शांतिपूर्वक स्थिति संभालने का प्रयास कर रहे थे, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
चलानी कार्यवाही से निपट सकता था मामला,
पुलिस पेंशनर्स संघ ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक साधारण यातायात नियम उल्लंघन (सीट बेल्ट) का मामला था, जिसे मौके पर चालान बनाकर निपटाया जा सकता था। लेकिन इसके विपरीत, थाना मण्डला के अधिकारियों द्वारा इसे गंभीर आपराधिक प्रकरण का रूप दे दिया गया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट भी जोड़ दिया गया, जिसे संघ ने पूरी तरह अनुचित और आधारहीन बताया है।
संघ ने यह भी सवाल उठाया कि जब लाइसेंसी बंदूक पति के नाम पर है और पत्नी उसके साथ मौजूद थी, तो उसे अपने पास रखने को अपराध कैसे माना गया, जबकि बंदूक का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ। संघ का कहना है कि यह कार्रवाई पुलिस की असंवेदनशीलता और गलत निर्णय का उदाहरण है।
तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा – प्रजापति
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान पुलिस पेंशनर्स संघ अध्यक्ष उमाशंकर प्रजापति ने बताया कि लगभग चार दशकों तक पुलिस विभाग में सेवाएं देने वाले 80 वर्षीय वरिष्ठ पेंशनर के साथ इस तरह की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पूरे प्रदेश के पुलिस पेंशनर्स में आक्रोश व्याप्त है।हमने ज्ञापन में प्रकरण क्रमांक 15/2026 को समाप्त करने, दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने, मामले की जांच किसी अन्य जिले के वरिष्ठ अधिकारी से कराने तथा पुलिस मैन्युअल के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है यदि इस प्रकरण में निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो वे प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। वहीं उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में न्यायसंगत निर्णय लेते हुए पीड़ित दंपत्ति को राहत प्रदान करेगा।










































