फ्रांस की राफेल को लेकर बड़ी तैयारी, F5 वैरिएंट पर UAE के साथ प्लान, भारत के लिए क्यों अहम?

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पेरिस: फ्रांस ने अपने महत्वाकांक्षी राफेल 5 फाइटर प्रोग्राम को लेकर संयुक्त अरब अमीरात के साथ रणनीतिक बातचीत तेज कर दी है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब फ्रांस-जर्मनी के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) प्रोजेक्ट लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है। इसके यूरोप की लंबे समय की लड़ाकू विमान की योजना पर असर पड़ा है। इस प्रोजेक्ट के रुकने ने यूरोप के डिफेंस ढांचे में दरार को सामने ला दिया है।

फ्रांस और UAE के बीच डिफेंस-इंडस्ट्री अगर सफल होती है तो यह भविष्य में पश्चिमी देशों की टैक्टिकल एयरपावर के विकास को काफी हद तक बदल सकती है। पेरिस अब खाड़ी के अमीर देशों को ऐसे रणनीतिक साझेदारों के तौर पर देख रहा है, जो एडवांस्ड एयरोस्पेस प्रोग्राम को जारी रखने में सक्षम हैं।UAE के साथ मिलकर विकसित करने की तैयारी

फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉटरीन ने इसी महीने बताया कि राफेल F5 प्रोग्राम को लेकर पेरिस, UAE के साथ सहयोगी की संभावना तलाश रहा है। डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट के अनुसार, UAE के रक्षा मंत्री की हालिया पेरिस यात्रा के दौरैन बातचीत को फिर से शुरू किया गया है। इसमें UAE की संभावित फंडिंग, भविष्य में राफेल खरीदने की प्रतिबद्धता के साथ ही अमीराती रक्षा कंपनियों की ज्यादा औद्योगिक भागीदारी शामिल है।

FACS को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों के कारण अब यह मुश्किल लगने लगा है कि यूरोप तय समय सीमा के भीतर छठी पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम तैयार कर पाएगा। यही वजह है कि फ्रांस अपने राफेल F5 प्रोग्राम को एक जरूरी रणनीतिक सुरक्षा उपाय के तौर पर देख रहा है।

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