छोटा तालाब (लोअर लेक) में बिना उपचारित छोड़े जा रहे बाणगंगा नाले के सीवेज को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर मानते हुए नाराजगी जताई है। ट्रिब्यूनल ने मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नगर निगम पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे में अब 17 महीने तक बिना शोधन के सीवेज छोटे तालाब में छोड़ने पर नगर निगम पर करीब 1.70 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
तालाब के पानी में मिल रहा सीवेज
राशिद नूर खान की याचिका पर गठित संयुक्त समिति ने एनजीटी के समक्ष रिपोर्ट पेश की, जिसमें सामने आया कि बाणगंगा नाले से छोटे तालाब में सीवेज पहुंच रहा है। तालाब में नाला मिलने वाले स्थान और किनारे के हिस्से में नगर निगम का ठोस कचरा भी जमा मिला।










































