सडक़ पर परहा लगाकर जताया विरोध,उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत झाडग़ांव के अंतर्गत आने वाले सहजाटोला के ग्रामीण विगत २० वर्षों से भी अधिक समय से पक्की सडक़ के निर्माण की आस लगाए बैठे हैं लेकिन अब उनका सब्र का बांध टूट चुका है। बारिश की शुरुआत होते ही सहजाटोला को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग गड्ढों और भयंकर कीचड़ के खतरनाक जाल में तब्दील हो चुके हैं। जिम्मेदारो की अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीणों ने सडक़ पर पसरे कीचड़ में धान का परहा यानि पौधा रोपकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया और शीघ्र डामरीकरण नही होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
स्कूली बच्चों और ग्रामीणों का जीना मुहाल
सहजाटोला से मुख्य मार्ग तक पहुँचने के लिए दो रास्ते बने हुए हैं पहला सहजाटोला से झाडग़ांव और दूसरा सहजाटोला से मेंढक़ी। दुर्भाग्यवश दोनों ही मार्ग आज भी कच्चे हैं। वर्तमान में बारिश के कारण रास्तों पर कीचड़ भर गया है और जगह जगह गहरे गड्ढे बन गए हैं। इसी खतरनाक रास्ते से होकर छोटे छोटे मासूम स्कूली बच्चे रोजाना स्कूल जाने को मजबूर हैं। आए दिन बच्चे कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं जिससे अभिभावकों में भारी चिंता व्याप्त है। यह मार्ग ना केवल विद्यार्थियों बल्कि स्थानीय किसानों और मजदूरों की आवाजाही का भी एकमात्र जरिया है। सडक़ की खस्ताहाल स्थिति के कारण पैदल चलना भी दूभर हो गया है। आए दिन लोग इस रास्ते पर फि सलकर गिर रहे हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने सडक़ निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों और स्थानीय पंचायत प्रशासन को लिखित व मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बावजूद ना तो पंचायत स्तर पर मुरूम गिट्टी डालकर कोई अस्थाई मरम्मत कराई गई और ना ही जिम्मेदार अधिकारियों ने समस्या की गंभीरता को समझा। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि सहजाटोला के दोनों मुख्य संपर्कों झाडग़ांव और मेंढकी मार्ग को जल्द से जल्द प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अंतर्गत शामिल कर पक्की डामरीकृत सडक़ का निर्माण कराया जाए। सुरक्षित यातायात और बेहतर कनेक्टिविटी पाना उनका बुनियादी अधिकार है। यदि जल्द ही सडक़ निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
मार्ग के खराब होने से स्कुल आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है-एकता मड़ावी
छात्रा एकता मडावी ने बताया कि हम सहजाटोला में रहते हैं मेंढक़ी स्कूल में पढ़ाई करने के लिए जाते हैं। रोजाना हमें इस मार्ग से आना जाना करना पड़ता है कई बार हम गिरने से बच जाते हैं कपड़े खराब हो जाते हैं और कई बार तो गिर भी जाते हैं। यह मार्ग जब बहुत ज्यादा खराब हो जाता है तो हम स्कूल भी नहीं जा पाते हैं छुट्टी लेना पड़ता है। बहुत ज्यादा इस मार्ग पर समस्या है और हर कोई परेशान है।
हर बार खाना पूर्ति की जाती है इस बार तो वह भी नहीं की गई है – आलोक बिसेन
ग्रामीण आलोक बिसेन ने बताया कि हम मेंढक़ी रहते हैं यह सडक़ पर २० वर्षों से अधिक समय हो गया है कोई काम नहीं हुआ है। ग्राम पंचायत में भी इस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया हर बार खाना पूर्ति की जाती है इस बार तो वह भी नहीं की गई है इस संबंध में सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारियों को बताया गया है पर कुछ हुआ नहीं। सहजाटोला के लोग आना जाना बहुत मुश्किल में करते हैं काफी तकलीफ होती है। यहां ग्रामीणों ने धान का पौधा रोपाई कर दिया है यह बताता है कि ग्राम में कितना आक्रोश है। यहां पर काम के नाम पर मुरुम डाल दी जाती थी जो इस वर्ष नहीं डाली है हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सडक़ बने डामरीकरण हो।
वर्तमान विधायक को ज्ञापन देकर भी अवगत कराया कुछ नही हुआ-संदीप सुलाखे
ग्रामीण संदीप सुलाखे ने बताया कि हम सहजाटोला रहते हैं ग्राम पंचायत झाडग़ांव है। शासन विकास की बात करता है परंतु डेवलपमेंट का मूल यातायात है जब सडक़ ऐसी होगी तो विकास कैसा होगा। हम कई वर्षों से यहां सहते आ रहे हैं सडक़ को ३० वर्ष से हम देख रहे हैं हमारे बुजुर्गों ने ५० वर्ष तक देखा है ऐसा कब तक चलेगा। वर्तमान विधायक को ज्ञापन देकर ७ बार हम मिलने गए हैं आश्वासन हमें वहां मिला है पंचायत में सरपंच को भी हमने कहा है। समस्या इतनी है कि ३ महीना बच्चे ढंग से स्कूल नहीं जाते हैं दुर्घटना होने की संभावनाएं बनी रहती है। मेंन रोड़ ढाई किलोमीटर दूर है ऐसा ही रहा तो हम जिला कलेक्टर के पास भी जाएंगे मुख्य सडक़ पर धरना प्रदर्शन और चक्काजाम भी करेंगे इसके लिए शासन प्रशासन जिम्मेदार होगा।










































