भारत खरीदेगा अमेरिकी जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम! सर्जियो गोर ने दी जानकारी, जानें क्यों है PAK के लिए बुरी खबर?

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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के मुताबिक, भारत अमेरिकी जेवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। इस संभावित सौदे से भारत में जेवलिन के सह-उत्पादन का रास्ता भी खुल सकता है, जिससे दोनों देशों के रक्षा और सैन्य विनिर्माण सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भारत अमेरिकी जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। सर्जियो गोर ने कहा कि भारत का जेवलिन जैसे युद्ध में आजमाए जा चुके एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदने का फैसला भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है।

भारतीय सेना ने अमेरिकी फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के तहत जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद के लिए लेटर ऑफ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिका ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होती रक्षा साझेदारी का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस सौदे के साथ भविष्य में जेवलिन की को-प्रोडक्शन यानी संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं भी खुल सकती हैं। जैवलिन एक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम है। इसे सैनिक कंधे से लॉन्च कर सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे अलग-अलग इलाकों में तेजी से तैनात किया जा सकता है।भारत के लिए क्यों अहम है जेवलिन?

इस पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम को दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका युद्ध में इस्तेमाल हो चुका है और इसे अमेरिकी सेना के प्रमुख एंटी-आर्मर हथियारों में गिना जाता है। पहाड़ी इलाकों से लेकर खुले मैदान तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सिस्टम टैंकों और दूसरे बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है।भारत लंबे समय से अपनी एंटी-टैंक क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रहा है। ऐसे में जेवलिन की संभावित खरीद से भारतीय सेना की टैंक रोधी क्षमता को मजबूती मिल सकती है। बता दें कि उन्होंने मई 2026 में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री की ओर से कही गई बातों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस सौदे से भारत में जैवलिन के सह-उत्पादन का रास्ता भी खुल सकता है।

जैवलिन सिस्टम की खासियत

LOA पर हस्ताक्षर के साथ ही भारत जैवलिन सिस्टम का आधिकारिक ग्राहक बन गया है। जैवलिन एक आधुनिक, मध्यम दूरी की फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई अन्य देशों की सेनाएं करती हैं।

यह मिसाइल मुख्य रूप से टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और मजबूत बंकरों व ठिकानों जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है। फायर-एंड-फॉरगेट तकनीक के कारण मिसाइल दागे जाने के बाद ऑपरेटर को लगातार लक्ष्य पर निशाना बनाए रखने की जरूरत नहीं होती।

भारत-अमेरिका रक्षा उद्योगों के बीच बढ़ेगा सहयोग

इस समझौते का महत्व केवल जैवलिन मिसाइल की खरीद तक सीमित नहीं है। अमेरिका के मुताबिक, इससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सह-उत्पादन और अन्य औद्योगिक सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। जैवलिन सिस्टम का निर्माण जैवलिन जॉइंट वेंचर करता है, जो RTX और लॉकहीड मार्टिन का संयुक्त उपक्रम है। अमेरिका का कहना है कि भविष्य में दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के लिए व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है।

सिर्फ खरीद नहीं, भारत में निर्माण की भी संभावना

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी बात यह है कि मामला केवल अमेरिकी हथियार खरीदने तक सीमित नहीं रह सकता। सर्जियो गोर ने को-प्रोडक्शन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया है। इससे भविष्य में भारत में अमेरिकी रक्षा तकनीक के साथ उत्पादन और रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने की संभावना बनती है।

हाल के दिनों में भारत-अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है। अमेरिकी राजदूत ने हाल ही में भारत में C-130J Super Hercules के उत्पादन से जुड़े औद्योगिक सहयोग को भी दोनों देशों के बढ़ते रक्षा संबंधों का उदाहरण बताया था

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