पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। श्री दिगंबर जैन मंदिर में १९ जून को श्रुत पंचमी महापर्व महामहोत्सव का आयोजन बेहद हर्षोल्लासए श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। यह गरिमामयी धार्मिक कार्यक्रम आचार्य भगवन गुरुदेव श्री विशुद्ध सागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री साक्ष्य सागर एवं मुनि श्री निवृत सागर मुनिराज के मंगल सानिध्य में संपन्न हुआ। मुनि द्वय की उपस्थिति से संपूर्ण मंदिर परिसर भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। महापर्व के अवसर पर प्रात: ७ बजे से ही जैन मंदिर में धार्मिक क्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले मंगलाष्टक के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात भगवान का परम पावन अभिषेक, श्रुत स्कंध का अभिषेक एवं विश्व शांति की मंगल कामना के साथ शांतिधारा संपन्न की गई। इस दौरान विद्वान प्रवर के निर्देशन में भव्य संगीतमय श्रुत स्कंध पूजन और गुरुपाद पूजन की विधि विधान से आराधना की गई। भक्तिमय भजनों की धुनों पर श्रद्धालुओं ने पूरी तन्मयता के साथ अघ्र्य समर्पित किए। धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत मंदिर मेें मुनि द्वय के मांगलिक उद्बोधन प्रवचन का आयोजन किया गया। अपने ज्ञानवर्धक और प्रेरक संबोधन में महाराज श्री ने श्रुत पंचमी के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला और कहाँ को आज हम जो श्रुत पंचमी महापर्व मना रहे हैं यह वह ऐतिहासिक दिन है जब प्रथम जिनवाणी के लेखन का कार्य पूर्ण हुआ था। प्राचीन काल में ज्ञान को मौखिक रूप से याद रखा जाता था और आचार्य गण प्रवचन के माध्यम से इसे आगे बढ़ाते थे। पूर्व में लोगों की स्मरण शक्ति याददाश्त बेहद मजबूत हुआ करती थी परंतु समय के साथ साथ मानव की याददाश्त कमजोर होने लगी। ऐसे में इस अमूल्य ज्ञान और ग्रंथों को विलुप्त होने से बचाने के लिए आचार्यों ने गहरी चिंता व्यक्त की। इस ज्ञान को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए आचार्य श्री ने दो योग्य शिष्यों के साथ ग्रंथ लेखन की शुरुआत की जिसके फ लस्वरूप आज यह जिनवाणी ग्रंथ हमारे सामने सुरक्षित रूप में उपलब्ध है। मुनि श्री ने सभी श्रद्धालुओं को जिनवाणी को अपने जीवन में उतारने और स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी। मुनि श्री के मांगलिक प्रवचन के पश्चात उनके पावन सानिध्य में पूज्य ग्रंथ एवं श्रुत स्कंध की एक विशाल एवं भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा श्री दिगंबर जैन मंदिर से गाजे.बाजे और जयकारों के साथ प्रारंभ हुई। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों जैसे गोलीबारी चौक,अंबेडकर चौक, नेहरू चौक सहित विभिन्न चौराहों और गलियों का भ्रमण करते हुए जय स्तंभ चौक पहुंची। वहां से भ्रमण करते हुए शोभायात्रा वापस श्री दिगंबर जैन मंदिर पहुंची जहां इसका विधिपूर्वक समापन किया गया। इस भव्य शोभायात्रा में जैन समाज के श्रद्धालु बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण श्रद्धालुओं का अनूठा भक्ति भाव था जहाँ लोग अपने सिर पर अत्यंत आदर और श्रद्धा के साथ जिनवाणी को रखकर चल रहे थे। पूरे रास्ते भक्तगण भगवान महावीर और जिनवाणी मां के गगनभेदी जयकारे लगा रहे थे जिससे संपूर्ण नगर का वातावरण धर्ममय हो गया। जगह जगह पर नगरवासियों के द्वारा शोभायात्रा और मुनि संघ का स्वागत व वंदन किया गया। इस अवसर पर श्री दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी सदस्य एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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