हादसे का इंतजार कर रहे अधिकारी,जर्जर प्राथमिक शाला भवन बनाने पर नही दिया जा रहा ध्यान

0



पदमेश न्यूज़,बालाघाट।एक ओर शासन प्रशासन द्वारा जिले में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में बच्चो को सुविधाएं दिए जाने का दावा किया जा रहा है तो वही दूसरी ओर जिम्मेदारो का जर्जर हो चुके पुराने शाला भवन पर कोई ध्यान नही है।आवेदन निवेदन के बाद भी जीर्ण शीर्ण हो चुके शाला भवनों का जीर्णोद्धार नही किया जा रहा है ताजा मामला बैहर विकासखंड के ग्राम पंचायत नव्ही अंतर्गत आने वाले भरेवाटोला का है।जहां स्थित प्राथमिक शाला भवन की जर्जर हालत अब बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है। लगातार खराब होती स्थिति और बरसात के मौसम को देखते हुए ग्राम के सरपंच एवं ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल नए शाला भवन के निर्माण की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक शाला भवन कई वर्षों पुराना हो चुका है और अब इसकी दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। भवन की छत जगह-जगह से टपकती है, जिससे कक्षाओं में सीपेज बना रहता है। बरसात के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है तथा कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से उक्त शाला भवन का तत्काल जीर्णोद्धार किए जाने की मांग की है।

पिछले 2 वर्षों से कर रहे आवेदन निवेदन, मिल रहा सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों ने बताया कि शाला भवन की जर्जर स्थिति को लेकर वे पिछले दो वर्षों से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन सौंप रहे हैं।करीब 1 वर्ष पूर्व कलेक्टर द्वारा ग्राम भोड़वा में जनसुनवाई का आयोजन किया गया था।उस जनसुनवाई के दौरान भी इस समस्या को उठाया गया था। उस समय अधिकारियों द्वारा जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक नए भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

कभी भी कोई दुर्घना हो सकती है,- मुकेश मेरावी
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान ग्राम पंचायत नव्ही सरपंच मुकेश मेरावी ने बताया कि हमारे गांव के भरेवाटोला स्थित प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से लेकर 5वी तक के बच्चे पढ़ते है।सभी बच्चे बैगा आदिवासी समाज के है।वह शाला भवन काफी पुराना हो चुका है।उसी जर्जर भवन में ही कक्षाए संचालित की जाती है।जहा कभी भी कोई हादसा हो सकता है।स्कूल में अध्ययनरत छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यदि समय रहते नया भवन स्वीकृत नहीं किया गया तो बरसात के दौरान किसी भी दिन अप्रिय घटना घट सकती है। उन्होंने बताया कि शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक होगा जब बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिले। जर्जर भवन में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना मजबूरी बन गया है। ऐसे में शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र नए विद्यालय भवन के निर्माण की दिशा में कदम उठाने चाहिए।लेकिन ऐसा नही हो रहा है।हम इसी मांग को लेकर पिछले 2 वर्षों से चक्कर काट रहे है।लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नही मिल रहा है।हमारी मांग है कि पुराने भवन का तकनीकी परीक्षण कराते हुए तत्काल नए भवन की स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए। ताकि आगामी बरसात में कोई अनहोनी ना हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here