एक स्कूल ऐसा भी… जहां एक जर्जर कक्ष में संचालित हो रही पांच कक्षाएँ !

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जहां एक और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासन प्रशासन के द्वारा नित्य नए-नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं तो शिक्षको हाईटेक करने के लिए प्रतिवर्ष नई नई योजनाएं भी बनाई जा रही है किंतु जमीनी हकीकत की बात करें तो परिणाम आखिरकार शून्य ही नजर आ रहा है ऐसा ही एक ताजा मामला आदिवासी वनांचल क्षेत्र तहसील बिरसा अंतर्गत ग्राम जगला कांटाबाहरा में देखने को मिल रहा है जहां पर कक्षा पहली से पांचवी तक की कक्षाएं एक ही छत के नीचे लगाई जा रही है एवं भवन की बात करें तो वह भी पूरी तरह खंडहर नुमा बन चुका है किंतु व्यवस्था नहीं होने के कारण शिक्षक के द्वारा मजबूरी में उसी भवन में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की संभावना बनी हुई है

यह पूरा मामला आदिवासी वनांचल क्षेत्र के तहसील बिरसा अंतर्गत आने वाले ग्राम जगला के शासकीय प्राथमिक शाला काटाबाहरा विकासखंड बिरसा का है जहां महज एक ही कक्ष में कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक की पांच कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है ऐसे में छात्रों को शैक्षणिक अध्ययन करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही शिक्षकों को भी ऐसी स्थिति में बच्चों को पढ़ाना एक चुनौती बन गई है , हैरानी की बात तो यह है कि विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए स्टाफ भी बहुत कम है, महज दो शिक्षक ही कक्षा पहली से लेकर कक्षा पांचवी तक की पाचों कक्षाओं का संचालन करते हैं जिससे स्कूल के संचालन में बहुत दिक्तो का सामना करना पड़ रहा है ।

जब पद्मेश न्यूज़ की टिम की नजर इस स्कूल पर पढ़ी तो यहाँ के शिक्षकों से इस विषय पर जानकारी ली तब शिक्षकों द्वारा बताया गया कि इस प्राथमिक शाला का निर्माण 2004 में हुआ था और मरम्मत के अभाव के कारण 2010 तक इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है शासन स्तर पर मरम्मत के लिए राशि दी जाती है लेकिन वह राशि अपर्याप्त होने की वजह से आज तक उसका मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हो पाया जिसकी वजह से यह भवन जर्जर व खंडहर में बदल चुका है फिर भी वह छात्रों का अध्यापन कार्य उसी जर्जर भवन के एक कक्ष में कराने को मजबूर है, जिससे छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी उस जर्जर कक्ष के गिरने का भय हमेशा बना रहता है । साथ ही शिक्षकों ने बताया कि एक ही कक्ष में पांच कक्षाओं का संचालन करना असंभव है फिर भी यह उनकी मजबूरी है कि वह एक ही कक्ष में पांच कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं ।

वही प्राथमिक शिक्षक उमेंद्र पटले ने बताया की एक ही कक्ष में 5 कक्षाओं का संचालन करना उनके लिए किसी संघर्षपूर्ण कार्य से कम नहीं है, कक्ष के अभाव के कारण उन्हें बच्चों को पढ़ाने लिए एक अच्छा माहौल नहीं मिल पाता है, वहीं उन्होंने बताया कि एक रूम में दो-दो शिक्षकों का पढ़ाना बिल्कुल असंभव कार्य है जिसकी वजह से बच्चों को शिक्षा देने के लिए वह कक्ष के सामने बने बरामदे में बच्चो को सामूहिक रूप से अध्यापन कार्य कराते हैं ।
वहीं उन्होंने आगे बताया कि शासन स्तर पर नई शिक्षा नीति के तहत मिशन अंकुर एफ एल एन में कक्षा पहली और कक्षा दूसरी का सुनियोजित टाइम टेबल बना हुआ है जिसका मैने प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुका हैं और मैं बच्चों पड़ाने के लिये बहुत उत्साहित भी हूं लेकिन कक्ष और व्यवस्थाओं के कारण हमारा यह सपना अधूरा रह जाता है, और जो शिक्षा हम बच्चों को देना चाहते हैं वह दे नहीं पाते हैं।
प्राथमिक शाला में किसी भी प्रकार का शौचालय नहीं है जो पहले बनाया गया था उसका केवल ढांचा बचा हुआ है साथ ही जर्जर भवन की मरम्मत कार्य के लिए शासन स्तर से जो राशि उन्हें प्राप्त हुई थी उसके बाद जब इंजीनियर के द्वारा भवन का निरीक्षण किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि जो राशि उन्हें शासन स्तर से मिली है उतनी राशि में इस भवन का मरम्मत करना संभव नहीं है जिसको देखते हुए हमारे द्वारा उस राशि को शासन को पुनः वापस कर दिया गया


वही प्राथमिक शाला में पढने वाले एक छात्र के अभिभावक ने बताया कि यहां एक ही कक्ष है और पांच कक्षाओं का अध्यापन कार्य किया जा रहा है ऐसे में सभी को शिक्षा मिलना संभव नहीं है और साथ ही उन्होंने बताया कि यहां दूर-दूर तक कोई प्राथमिक स्कूल नहीं है जहां वह अपने बच्चों को भेज सकें कुछ लोग प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन करा देते हैं लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है जिससे वह यही प्राथमिक शाला में अपने बच्चों को भेजने को मजबूर है ।

वहीं ग्रामीण लोकेश कुमार पटले ने बताया कि बच्चों को वहां पढ़ाना किसी खतरे से कम नहीं है, उन्होंने बताया कि पहले से एक अतिरिक्त कक्ष बना हुआ था जिसमें पहली से लेकर पांचवी तक की कक्षाओं का अध्यापन कार्य कराया जा रहा है जिससे बच्चों को अध्ययन करने में और शिक्षकों को भी अध्यापन करने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्होंने शासन से मांग की है कि स्कूल में अतिरिक्त कक्ष होना चाहिए जिससे बच्चों को अलग-अलग अध्यापन कार्य कराया जा सके ।

वही जब हमने प्राथमिक शाला की प्रधानाध्यापिका विनीता शांडिल्य इस विषय पर चर्चा की तो उन्होंने बताया कि कक्ष के अभाव के कारण हमें जैसे तैसे कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है हमारे पास पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है जिसकी वजह से केवल दो ही शिक्षक एक ही कक्ष में पांच कक्षाओं का अध्यापन कार्य कराते हैं, उन्होंने बताया कि शाला का जर्जर भवन कक्षा संचालन के योग्य तो नहीं है फिर भी वह उसके बरामदे में बच्चों को शैक्षणिक कार्य कराते हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने कई बार डाइस प्रपत्र के माध्यम से और शाला प्रबंधन की तरफ से कई बार प्रस्ताव और आवेदन दिए गए लेकिन राशि इतनी कम आती है कि कार्य कराना असंभव होता है इसलिए उन्हें राशि वापस करनी पड़ती है ।

वही हमारे द्वारा इस पूरे मामले को लेकर आदिवासी सहायक आयुक्त प्रभारी राहुल नायक से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया

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