Lord Vishnu Statue: खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति को उनका सिर मिलने वाला है। इसे लेकर एएसआई की ओर कवायद शुरू कर दी गई है। बिना सिर के भगवान की मूर्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका लगाई गई थी। इसका निर्माण चंदेल युग में हुआ था।छतरपुर: पर्यटन नगरी खजुराहो में बिना सिर वाली भगवान विष्णु की मूर्ति को आखिरकार उसका सिर वापस मिलने वाला है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल खजुराहो के स्मारकों के समूह का हिस्सा, जवारी मंदिर में 11वीं सदी के चंदेल युग के देवता की खोई हुई मूर्ति को सिर को फिर से लगाने की प्रक्रिया की शुरू कर दी हैशुरू कर दी गई है पहल
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में एएसआई के पीआरओ और ज्वाइंट डायरेक्टर जनरल डॉ नंदिनी भट्टाचार्य ने इस बात की पुष्टि की कि बहाली की दिशा में काम शुरू हो गया है। हालांकि असल मरम्मत में समय लगेगा। उन्होंने कहा कि हां, आगे की कार्रवाई की जाएगी और उस दिशा में काम शुरू हो गया है। लेकिन मरम्मत का काम अभी शुरू नहीं हुआ है और सही जांच-पड़ताल के बाद इसमें कुछ समय लगेगा।
एएसआई के डीजी ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए एएसआई के अलग-अलग क्षेत्रों के सदस्यों वाली एक टीम बनाई है। टीम जल्द ही अपना काम शुरू करेगी।
डॉ नंदिनी भट्टाचार्य, पीआरओ एएसआई
सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा मामला
यह घटनाक्रम सात फुट ऊंची विष्णु की मूर्ति के सुप्रीम कोर्ट में विवाद का केंद्र बनने के एक साल बाद हुआ है। सितंबर 2025 में तत्कालीन चीफ जस्टि ऑफ इंडिया बी आर गवाई की अध्यक्षता वाली बेंच ने हरियाणा के किसान-कार्यकर्ता राकेश दलाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें क्षतिग्रस्त मूर्ति के पुननिर्माण और उसे फिर से स्थापित करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह मामला एएसआई के अधिकार क्षेत्र में आता है।प्रचार के लिए दायर याचिका दिया था करार
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इसे पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन करार दिया था। सुनवाई के एक महीने बाद विवाद बढ़ गया था। अक्टूबर 2025 में, गवई सीजेआई थे, तब 72 वर्षीय वकील राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट के अंदर उन पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। बाद में इस घटना को खजुराहो विष्णु मामले की सुनवाई को लेकर वकील के गुस्से से जोड़ा गया था।
यह बहुत खुशी की बात है कि सरकार हमारी बात मान गई है। सरकार और एएसआई ने हमारी धार्मिक भावनाओं को समझा है।
राकेश दलाल, सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता
मूर्ति पर काम किया जाना है बाकी
अब एएसआई ने इस मामले को औपचारिक संरक्षण प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया है। और जिस मूर्ति पर काम किया जाना बाकी है, वह चंदेल कला का एक शानदार नमूना है।जवारी मंदिर आकार में हैं छोटा
दरअसल, खजुराहो में जवारी मंदिर आकार में छोटा है लेकिन इसकी नक्काशी बहुत ही बेहतरीन है। यहां बलुआ पत्थर से बनी विष्णु मूर्ति का धड़, चार हाथ और पैर तो सलामत हैं, लेकिन सिर गायब है। उनके सिर पर बहुत बारीकी से नक्काशी किए गए कौस्तुभ मणि, वनमाला, रत्नों से जड़ी करधनी और पाजेब बने हैं और उनके दोनों ओर लक्ष्मी और गरुड़ की आकृतियां हैं।
कई आकृतियां हैं मौजूद
वहीं, मुख्य देवता के चारों ओर विष्णु के छोटे रूप राम, वराह, नरसिंह, बलराम, कूर्ण और कल्कि मौजूद हैं। पत्थर पर वैष्णव परंपरा का एक अद्भुत दृश्य बनाते हैं। 1075 और 1100 ईस्वी के बीच बने इस मंदिर की खासियत इसका पतला, ऊंचा शिखर और सजावटी मकर तोरण हैं।हालांकि दलाल की याचिका में मूर्ति के खंडित होने का कारण मुगल आक्रमणों को बताया गया था लेकिन असल में किन हालात में विष्णु की मूर्ति का सिर टूटा, यह अभी तक पता नहीं चल पाया है। एएसआई की टीम अब जांच करके तय करेगी कि इस क्षतिग्रस्त उत्कृष्ट कलाकृति को कैसे संरक्षित किया जा सकता है।
इसलिए एएसआई का अगला कदम बहुत अहम है। मरम्मत से पहले ठीक से जांच की जाएगी और चुनौती यह होगी कि यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में मौजूद इस प्राचीन मूर्ति की असलियत से समझौता किए बिना देवता की मूर्ति को ठीक किया जाए।









































