108 एम्बुलेंस व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक एम्बुलेंस का इंतजार करता रहा हितग्राही,
आखिरकार जेब से पैसे खर्च कर निजी एम्बुलेंस से जाना पड़ा घर
जिले में महज 24 एम्बुलेंस के भरोसे पूरी व्यवस्था, जिला अस्पताल के हिस्से में सिर्फ 2 वाहन
भोपाल से हो रहा संचालन,
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट।एक ओर मप्र सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है,तो वहीं दूसरी ओर मरीजों को सरकार की मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी नही मिल पा रहा है।ऐसे में सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओ पर सवाल उठना लाजिमी है।दरअसल हम बात कर रहे है। सम्पूर्ण मप्र में सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवाओ की।जिसकी बत्तर सेवाओ का नजारा सोमवार को जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में देखने को मिला।जहां अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद एक हितग्राही सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक एम्बुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन उसे 108 एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी। आखिरकार थक-हारकर हितग्राही को अपनी जेब से पैसे खर्च कर निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था कर, घर जाना पड़ा।यह घटना महज एक हितग्राही की परेशानी नहीं, बल्कि जिले में आपातकालीन परिवहन व्यवस्था की उपलब्धता और संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।सवाल यह है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मरीज को घर पहुंचाने के लिए भी 7 घंटे तक इंतजार करना पड़े, तो जरूरत के समय 108 एम्बुलेंस सेवा कितनी कारगर साबित हो रही होगी?
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला एक गर्भवती महिला के प्रसव से जुड़ा है दरअसल लांजी तहसील,पोस्ट कुम्हारी कला के ग्राम बिजले निवासी 28 वर्षीय महिला ज्योति पति गोविंद विहोने को प्रसव पीड़ा होने पर 7 अक्टूबर को जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में लाकर भर्ती कराया गया था। जहां उसी रात करीब 9:30 बजे ज्योति ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। बताया गया कि 13 अक्टूबर को महिला ज्योति को ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज किया गया और 108 एंबुलेंस सेवा से उन्हें घर जाने को कहा गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें सोमवार सुबह 10 बजे डिस्चार्ज कर दिया गया था और वे सुबह करीब 11 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 108 एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एम्बुलेंस उन्हें लेने ट्रामा सेंटर नहीं पहुंची। बार-बार भोपाल मुख्यालय में फोन करने के बावजूद भी ना तो एंबुलेंस चालक का मोबाईल नंबर दिया गया, ना उन्हें 108 वाहन क्रमांक उपलब्ध कराया गया और ना ही उन्हें इस सेवा का लाभ दिया गया।उधर 108 एम्बुलेंस कि राह देख रहे,हितग्राही को 7 घंटे बीत जाने के बाद भी 108 एंबुलेंस सेवा योजना का लाभ नहीं मिला।जिसके चलते हितग्राही को मजबूरन पैसे खर्च करके निजी वाहन से वापस अपने घर लौटना पड़ा ,जिन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए व्यवस्थाओं में सुधार किए जाने की मांग की है।
सात घंटे की प्रतीक्षा, फिर भी नहीं मिली सुविधा
जानकारी के अनुसार, अस्पताल से छुट्टी मिलने के
बाद हितग्राही को घर जाने के लिए 108 एम्बुलेंस
की जरूरत थी। इसके लिए सुबह करीब 11 बजे
इंतजार शुरू हुआ।उम्मीद थी कि कुछ ही देर
में एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन ऐसा नही हुआ। समय बीतता गया,उधर इंतजार खत्म होने का नाम नहीं लिया। सुबह से दोपहर और फिर शाम हो गई, मगर एम्बुलेंस नहीं पहुंची। शाम 6 बजे तक इंतजार करने के बाद भी जब सुविधा नहीं मिली, तो हितग्राही के सामने निजी एम्बुलेंस से जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। मजबूरी में उसे अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। इस पूरे घटनाक्रम ने 108 सेवा की उपलब्धता, मरीजों के प्रति जिम्मेदारी और व्यवस्था की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी एम्बुलेंस समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है, इसका खामियाजा मरीजों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर भुगतना पड़ रहा है।
500 बेड का अस्पताल महज 2 एम्बुलेंस के भरोसे, जिले में 24,
जिले में 108 एम्बुलेंस सेवा के तहत महज 24 एम्बुलेंस होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, जिला अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था
के भरोसे केवल 2 एम्बुलेंस होने की बात कही जा रही है।ऐसे में जिले की जरूरतों के मुकाबले वाहनों की संख्या पर्याप्त नहीं है।ज्ञात हो कि जिला अस्पताल 500 बेड वाला जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में जिलेभर से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। गंभीर मरीजों को रेफर करने, जरूरतमंदों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने और अन्य आवश्यक सेवाओं के बीच एम्बुलेंस की उपलब्धता बेहद महत्…हमारे हाथ में कुछ नहीं है,सब भोपाल से ही होता है- निशिथ श्रीवास्तव
उधर जिले में कथित रूप से 108 एंबुलेंस सेवाओं का मैनेजमेंट संभाल रहे वेंडर निशिथ श्रीवास्तव ने दूरभाष पर चर्चा के दौरान बताया कि वे महज एक वेंडर है, जिले में 108 एंबुलेंस का संचालन भोपाल स्तर से ही होता है। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल में महज 2 एंबुलेंस है, जो किसी काम से कहीं गई होगी, शायद इसीलिए हितग्राही को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते, यह मामला भोपाल स्तर का है भोपाल स्तर से ही इस समस्या का समाधान हो सकता है।









































