बुदबुदा से नदी टोला के बीच निर्मित उच्चस्तरीय पुल के निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बुदबुदा में बुदबुदा से नदी टोला के बीच निर्मित हो रहे उच्चस्तरीय पुल के निर्माण में लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने नल जल योजना की पाइपलाइन की स्थिति का ध्यान रखे बिना ही पुल के पिलर का निर्माण कर दिया जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। अब स्थिति यह है कि नल जल योजना का पानी गांव तक पहुंचने के बजाय पुल के पिलर के विभिन्न स्थानों से रिसकर बाहर निकल रहा है। कहीं पानी बूंद.बूंद टपक रहा है तो कहीं धार के रूप में बह रहा है। पिलर पर जंग की मोटी परत दिखाई देने से ग्रामीणों ने पुल की मजबूती को लेकर भी चिंता जताई है। इसमें बार बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी समस्या के निराकरण पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
पुल निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पाइपलाइन
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बुदबुदा और नदी टोला के बीच नदी होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों के द्वारा यहां पुल निर्माण की मांग लगातार उठाई जा रही थी। वहीं नदी टोला तक पेयजल पहुंचाने के लिए नदी के दूसरी ओर उपलब्ध जल स्रोत से नल जल योजना की पाइपलाइन बिछाई गई थी। इसी बीच पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल के कार्यकाल में यहां उच्चस्तरीय पुल स्वीकृत करवाकर निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। पुल निर्माण के दौरान नदी टोला की ओर पहले पिलर के लिए खुदाई की गई उसी स्थान पर नल जल योजना की पाइपलाइन मौजूद थी। पाइपलाइन को सुरक्षित रखने अथवा स्थानांतरित करने की आवश्यकता को लेकर ग्रामीणों ने विरोध भी जताया था। लेकिन निर्माण एजेंसी ने कथित तौर पर उनकी आपत्तियों को नजर अंदाज कर उसी स्थान पर पिलर का निर्माण कर दिया। इसके चलते पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से भी की लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। वर्तमान में पुल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और यहां से आवागमन भी शुरू हो गया है। हालांकि एप्रोच रोड़ सहित कुछ छोटे.बड़े कार्य शेष बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर नदीटोला की ओर स्थित पहले पिलर में पाइपलाइन से पानी का रिसाव लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों के मुताबिक पाइपलाइन से निकलने वाला पानी पिलर के भीतर पहुंचकर अलग.अलग स्थानों से बाहर आ रहा है। कुछ जगहों पर पानी की धार बह रही है जबकि अन्य स्थानों पर सीपेज के रूप में रिसाव दिखाई दे रहा है। पिलर पर जंग की मोटी परत नजर आने से आशंका है कि लगातार नमी रहने से अंदर मौजूद लोहे के सरिये प्रभावित हो सकते हैं। इससे भविष्य में पुल की मजबूती पर प्रतिकूल असर पडऩे की चिंता भी है। इस समस्या को लेकर ग्रामीण पिछले एक वर्ष से संबंधित सेतु विभाग और ठेकेदार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इसके बावजूद ना तो क्षतिग्रस्त पाइपलाइन का समुचित सुधार किया गया और ना ही पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए। परिणाम स्वरूप अब पाइपलाइन से निकलता पानी पुल के पिलर के भीतर और आसपास लगातार रिस रहा है। ग्रामीणों ने शासन प्रशासन और संबंधित सेतु विभाग से मांग की है कि मामले की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। क्षतिग्रस्त नल जल पाइपलाइन को व्यवस्थित रूप से दुरुस्त करने के साथ पिलर में हो रहे पानी के रिसाव को बंद कराया जाए तथा उसकी मजबूती की भी जांच की जाए। अन्यथा उन्हें जन आंदोलन करना पड़ेगा इसके लिए शासन प्रशासन जिम्मेदार होगा।
पाइपलाइन को पिलर के नीचे दबा देने से पानी का हो रहा रिसाव-सूरज कडूकर
सूरज कडूकर ने बताया कि यह उच्च स्तरीय पुल को बनाने गांव वालों ने ३० वर्ष संघर्ष किया। सभी विधायक के पास गए इसमें पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल ने पुल स्वीकृत करवाया। हमारे यहां नल जल योजना का सोर्स नदी के दूसरे छोर पर है,वहां से पाइपलाइन हमारे गांव तक आती है नदी क्रॉस करके उस पर पुल का पहला पिलर बना दिया गया। इसके लिए गड्ढा खोदते समय हमने आपत्ति भी लिए थे परंतु ध्यान नहीं दिया गया पाइपलाइन को पिलर के नीचे दबा दिया गया। पाइपलाइन टूट चुकी है जिससे यह पिलर ४ वर्ष बाद खराब हो जाएगा और हमारी जो वर्षों की मेहनत थी वह पुल क्षतिग्रस्त होते ही खराब हो जाएगी। यह कंपनी वाले तो बना करके भागना चाहते हैं ए









































