ढूटी नहर की माइनर बदहाल खेतों तक नहीं पहुंच रहा पानी

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टूटे किनारे झाडियों और गंदगी से बढ़ी परेशानी पानी के लिए भटक रहे किसान

पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। नगर के मध्य से गुजरने वाली ढूटी नहर से वार्ड नंबर ३ की ओर निकलने वाली माइनर नहर की हालत वर्तमान में बेहद खराब हो गई है। ग्राम सिकंद्रा एवं थानेगांव नाले तक जाने वाली इस माइनर के जगह जगह से क्षतिग्रस्त होने के साथ ही झाडिय़ों और गंदगी की भरमार बनी हुई है। इसके कारण किसानों के खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। स्थिति यह है कि नहर का पानी शहर की सीमा तक ही पहुंच पा रहा है जबकि इसके आगे स्थित खेतों तक पानी नहीं पहुंचने से किसान परेशान हैं। फ सलों के लिए अंतिम पानी की आवश्यकता के बीच उत्पन्न हुई इस समस्या ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

अंतिम पानी के लिए दूसरे किसानों पर निर्भरता

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस माइनर नहर पर निर्भर किसानों ने अपने खेतों में धान की लंबी अवधि वाली किस्मों की खेती की है। वर्तमान में कुछ किसानों की धान की फ सल कटाई के लिए तैयार हो रही है जबकि कुछ खेतों में फ सल को पकने के लिए अभी और समय की आवश्यकता है। ऐसे में फ सलों को अंतिम पानी देना बेहद जरूरी है। लेकिन नहर की खराब स्थिति और पानी का प्रवाह आगे तक नहीं पहुंचने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नहर से पानी नहीं मिलने के कारण किसानों को अपनी फ सल बचाने के लिए आसपास के उन किसानों से पानी खरीदना पड़ रहा है, जिनके पास सिंचाई के वैकल्पिक साधन उपलब्ध हैं। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। एक ओर खेती में पहले ही लागत बढ़ चुकी है वहीं दूसरी ओर समय पर सिंचाई नहीं होने की आशंका से किसान चिंतित हैं। इस महत्वपूर्ण चरण में पानी की कमी होने से उपज प्रभावित हो सकती है। वर्तमान परिस्थितियों में उनकी समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। किसानो ने माइनर नहर की बदहाल स्थिति और पानी की समस्या को लेकर संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। यहां तक कि जब विभागीय अधिकारी पानी के शुल्क की राशि लेने के लिए गांव पहुंचते हैं तब भी किसानों द्वारा उन्हें नहर की स्थिति और खेतों तक पानी नहीं पहुंचने की समस्या बताई जाती है। इसके बावजूद अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। यदि नहर की समय रहते मरम्मत कराई जाती और पानी के प्रवाह को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते तो उन्हें इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता। वर्तमान में सिंचाई की जरूरत के समय पानी उपलब्ध नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका सता रही है। इस माइनर नहर के सीमेंटीकरण की स्वीकृति मिलने की बात भी सामने आ रही है लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है। ऐसे में किसान इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि नहर की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा। फि लहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी मौजूदा फ सल के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करना है। किसानों का आरोप है कि बार बार शिकायत करने के बाद भी उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। खेती पूरी तरह समय पर सिंचाई और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करती है । ऐसे में नहर के रख रखाव में लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि माइनर नहर का तत्काल निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत कराई जाए झाडियों और गंदगी की सफ ाई की जाए तथा ग्राम सिकंद्रा से थानेगांव नाले तक पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही प्रस्तावित सीमेंटीकरण कार्य को भी शीघ्र प्रारंभ किया जाए,ताकि किसानों को भविष्य में सिंचाई के लिए इस तरह परेशान ना होना पड़े।

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