रेस्क्यू किए गए सांप के दोनों मुंह अलग-अलग और स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। दोनों मुंह सक्रिय हैं, जबकि गर्दन के आगे से सांप का शरीर एक ही है। सांप की लंबाई करीब 5 से 6 इंच है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आनुवंशिक विकृतियों के कारण ऐसी स्थिति विकसित हो सकती है।Wolf Snake Rescued in Dahod : दाहोद में वन्यजीवों से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ घटना सामने आई है। ‘प्रकृति मित्र मंडल, दाहोद’ की रेस्क्यू टीम ने वन विभाग के सहयोग से दो स्वतंत्र मुंह वाले बेहद दुर्लभ वुल्फ स्नेक का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया है। संस्था के दावे के मुताबिक, दाहोद और संभवतः पूरे गुजरात में इस तरह के दो स्वतंत्र मुंह वाले वुल्फ स्नेक का यह पहला रेस्क्यू है।
यह रेस्क्यू संस्था के स्थापना दिवस यानी 4 अक्टूबर को किया गया। हालांकि, टीम को इसकी सूचना 3 अक्टूबर को धानपुर रेंज से मिली थी। सूचना मिलने के बाद रेस्क्यू टीम का एक सदस्य मौके पर पहुंचा और सांप को सुरक्षित तरीके से एक बर्तन में रखकर रेस्क्यू किया गया। इसके बाद सांप की तस्वीरें विशेषज्ञों को भेजी गईं। विशेषज्ञों से पुष्टि के बाद इसकी पहचान वुल्फ स्नेक के रूप में हुई। यह सांप गैर-विषैला प्रजाति का है।सांप के दो मुंह, एक शरीर
रेस्क्यू किए गए सांप के दोनों मुंह अलग-अलग और स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। दोनों मुंह सक्रिय हैं, जबकि गर्दन के आगे से सांप का शरीर एक ही है। सांप की लंबाई करीब 5 से 6 इंच है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आनुवंशिक विकृतियों के कारण ऐसी स्थिति विकसित हो सकती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘बाइसेफली’ कहा जाता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना बेहद दुर्लभ है और करीब एक लाख जीवों में से किसी एक में देखने को मिल सकती है।प्राकृतिक जीवन में कई चुनौतियां
दो मुंह वाले ऐसे जीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण में लंबे समय तक जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। भोजन तलाशने या दिशा तय करने के दौरान दोनों मुंह स्वतंत्र रूप से प्रयास कर सकते हैं। शिकार निगलते समय दोनों सिरों के बीच ही प्रतिस्पर्धा हो सकती है। वहीं, प्राकृतिक शिकारियों से बचते समय सही दिशा तय करने में भी परेशानी हो सकती है। वुल्फ स्नेक गैर-विषैला सांप है। यह घरों और मानव बस्तियों के आसपास मिलने वाली छिपकलियों, कीड़ों और छोटे जीवों को अपना भोजन बनाता है। इस वजह से यह प्राकृतिक इको-सिस्टम और कीट नियंत्रण में भी भूमिका निभाता है।
रेस्क्यू टीम के कन्वीनर किन्नर देसाई ने क्या बताया?
प्रकृति मित्र मंडल की रेस्क्यू टीम के कन्वीनर और सांप का रेस्क्यू करने वाले किन्नर देसाई ने बताया कि 3 अक्टूबर को धानपुर रेंज से दो मुंह वाला सांप दिखाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद टीम के एक सदस्य को मौके पर भेजा गया और सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया। देसाई के मुताबिक, सांप की तस्वीरें विशेषज्ञों को भेजी गईं, जिसके बाद उसकी पहचान की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि दोनों मुंह अलग-अलग तरीके से काम करते हैं और दोनों सक्रिय हैं, जबकि आगे से शरीर एक ही है।
देसाई ने दावा किया कि गुजरात में इस तरह के दो मुंह वाले सांप को जीवित अवस्था में रेस्क्यू करने की यह पहली घटना है। उनके मुताबिक, आधिकारिक रिकॉर्ड की बात करें तो भारत में इस तरह के दो मुंह वाले सांप के रेस्क्यू की यह पांचवीं घटना है, जिसमें वुल्फ स्नेक का यह तीसरा मामला बताया गया है।









































