मांगों पर अड़ा वंशानुगत ढीमर मछुआ समाज, दूसरे दिन भी जनपद के सामने डटा धरना,

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नव सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन जारी, प्रशासन की बेरुखी पर नाराजगी,

वंशानुगत ढीमर मछुआ समाज अपनी नव सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से जिला मुख्यालय पहुंचकर स्थानीय जनपद पंचायत के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहा है। मंगलवार को आंदोलन के दूसरे दिन भी समाज के लोग धरना स्थल पर डटे रहे और अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि मांगों का निराकरण होने तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

समिति पदाधिकारी शेखर जायसवाल ने कहा कि समाज पिछले लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शासन और प्रशासन के समक्ष आवेदन एवं ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात रखता आ रहा है। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस बार केवल आश्वासन के भरोसे आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। शेखर जायसवाल के अनुसार सोमवार को समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें वहां प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर मिले निर्देश और परिस्थितियों के चलते उन्होंने अपना प्रदर्शन स्थानीय जनपद पंचायत के सामने शुरू किया। सोमवार के बाद मंगलवार को भी समाज के लोग इसी स्थान पर टेंट लगाकर धरने पर बैठे रहे। आंदोलनकारियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि दो दिन से धरना चलने के बावजूद संबंधित विभाग का कोई अधिकारी उनसे चर्चा करने नहीं पहुंचा। समाज पदाधिकारी का कहना है कि न तो विभागीय अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और न ही प्रशासन की ओर से कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने आया। इससे आंदोलनकारियों में प्रशासन के प्रति नाराजगी और बढ़ती जा रही है। धरना स्थल पर मंगलवार को दिनभर समाज के लोगों ने टेंट लगाकर माइक के माध्यम से अपनी मांगों और समस्याओं को उठाया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं और कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद समाधान के बजाय लगातार आश्वासन ही मिलते रहे हैं। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नव सूत्रीय मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। शेखर जायसवाल ने कहा कि जरूरत पड़ी तो समाज के लोग आमरण अनशन पर बैठेंगे और इसके बाद भी मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन का विस्तार करते हुए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। समाज पदाधिकारी ने कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति में पैदा होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि समाज शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहा है और प्रशासन से बातचीत कर समाधान चाहता है, लेकिन यदि उनकी बात सुनने के लिए कोई आगे नहीं आता है तो आंदोलन को मजबूरन अगले चरण में ले जाना पड़ेगा। मंगलवार को दूसरे दिन भी धरना जारी रहने के साथ अब प्रशासन के सामने समाज की मांगों को लेकर बातचीत शुरू करने की चुनौती है। वहीं आंदोलनकारी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से क्या पहल होती है और क्या समाज को चर्चा के लिए बुलाया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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