मवेशी की मौत पर सरकारें हिल जाती हैं, यहां 30 बच्चों की मौत पर किसी को परवाह नहीं

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आजाद समाज पार्टी कांशीराम प्रदेश अध्यक्ष विद्रोही का सरकार पर तीखा हमला
सत्येन्द्र विद्रोही ने कहा—बिरसा के बैगा बच्चों की मौत के लिए स्वास्थ्य विभाग और सरकार जिम्मेदार,
पूर्व सीएचएमओ डॉ. परेश उपलप को निलंबित नहीं किया तो होगा बड़ा आंदोलन
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पदमेश न्यूज़ | बालाघाट।बैहर विधानसभा क्षेत्र के बिरसा इलाके में आदिवासी बैगा बच्चों की संक्रमण से हुई मौतों का मामला एक बार फिर गरमा गया है। मंगलवार को स्थानीय सर्किट हाउस में आयोजित भीम आर्मी एकता मिशन एवं आजाद समाज पार्टी कांशीराम की विस्तार एवं समीक्षा बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सत्येन्द्र विद्रोही ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिरसा क्षेत्र में करीब 30 आदिवासी बैगा बच्चों की मौत के बावजूद शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही है।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए सत्येन्द्र विद्रोही ने कहा कि “मवेशी की मौत होने पर सरकारें गिर जाती हैं, लेकिन यहां 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई, किसी को कोई परवाह नहीं है।” उन्होंने कहा कि बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आज भी स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों को झिरिया का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनके अनुसार, इसी तरह की बदहाल व्यवस्थाओं के चलते संक्रमण फैलने से मासूम बच्चों की जान गई।

करोड़ों के विकास बजट पर उठाए सवाल
विद्रोही ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों के विकास और उत्थान के लिए शासन से करोड़ों रुपये की राशि आती है, लेकिन उसका उचित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वर्षों से इन क्षेत्रों में विकास के नाम पर राशि खर्च की जा रही है तो फिर आज भी ग्रामीण स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से क्यों वंचित हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

बच्चों की जान की कीमत महज दो लाख क्यों?
मुख्यमंत्री द्वारा मृत बच्चों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा पर भी प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के परिवारों ने अपने मासूम बच्चों को खोया है, उनके लिए घोषित सहायता राशि भी अभी तक नहीं पहुंची है। विद्रोही ने कहा कि “जो बच्चे देश और समाज के विकास में अपनी भूमिका निभा सकते थे, उनकी जिंदगी की कीमत महज दो लाख रुपये कैसे तय की जा सकती है?”उन्होंने पीड़ित परिवारों को पर्याप्त आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।

पूर्व सीएचएमओ को बर्खास्त करने की मांग
बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए विद्रोही ने पूर्व सीएचएमओ डॉ. परेश उपलप के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को केवल हटाना या स्थानांतरित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई और मृत बच्चों के परिवारों को न्याय नहीं मिला तो भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।

तो सड़क पर उतर कर करेंगे बड़ा आंदोलन-
विद्रोही ने भाजपा सरकार पर दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।अंत मे उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों की मौत के विरोध में 3 सितंबर को जिला मुख्यालय में बंद और बड़ा आंदोलन किया गया था। इसके बावजूद यदि शासन-प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।बैठक में आजाद समाज पार्टी कांशीराम एवं भीम आर्मी के अध्यक्ष रितेश -बोरकर, निलेश बौद्ध, संतोष गेडाम सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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