पुरानी पेंशन बहाली, समान समयमान वेतनमान का लाभ एवं टीईटी परीक्षा रद्द करने सहित अन्य लंबित मागों को पूरा करने की मांग की
पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आव्हान पर २३ सूत्रीय मांगों को लेकर लालबर्रा म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ के बैनर तले संघ के पदाधिकारी एवं शिक्षकों ने मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार भूपेन्द्र अहिरवार को ज्ञापन सौंपकर लंबित मांगों एवं टीईटी परीक्षा को रद्द करने की मांग की है। वहीं मांगे पूरी नही होने पर प्रांतीय आव्हान पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। चर्चा में म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों के हितैषी घोषणाओं को पूरा किये जाने की मांगों को लेकर बार-बार ज्ञापन के माध्यम से अवगत करवाया जा रहा है। जिसमें अधिकारी/कर्मचारियों एवं पेंशनरों को स्वास्थ्य बीमा योजना, कर्मचारी आयोग के गठन सहित दो संतान की बाध्यता समाप्त करने संबंधित आदेश की कार्यवाही अपेक्षित है। शासन की हठधर्मिता के कारण प्रदेश के समस्त वर्गों के कर्मचारी/अधिकारियों में रोष व्याप्त है। इसलिए सरकार से लंबे समय से पुरानी पेंशन सहित अन्य लंबित मांगों को पूरा किये जाने की मांग की जा रही है लेकिन सरकार उसे पूरा नही कर रही है। मंगलवार को म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आव्हान पर २३ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया है और सरकार से उक्त मांगों को जल्द पूरा किये जाने की मांग की है। यदि मांगे पूरी नही होती है तो आगामी समय में सभी शिक्षक आंदोलन करने बाध्य होगें जिसकी जवाबदारी शासन-प्रशासन की होगी।
ये है प्रमुख मांगे
म.प्र. राज्य कर्मचारी संघ लालबर्रा द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना वरिष्ठता के साथ लागू किये जाने, ग्रेज्यूटी की सीमा केन्द्र के सामान २५ लाख किये जाने, शिक्षा विभाग, आदिम जाति कार्य विभाग में नवीन शैक्षणिक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना नियुक्ति दिनांक से की जाने, अधिकारियों-कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केन्द्र के समान महंगाई भत्ता दिये जाने, लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के समान समयमान वेतनमान का लाभ दिये जाने, दो से अधिक संतान की बाध्यता वाले आदेश को तत्काल निरस्त करने, स्थाई कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ दिये जाने, पंचायत सचिवों का संविलियन पंचायत विभाग में किये जाने, नवीन नियुक्तियां में स्टाप फंड की व्यवस्था को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्णय अनुसार समाप्त कर २ वर्ष की परिवीक्षा अवधि के पूर्णवर्ति नियम को लागू किये जाने, कृषि विस्तार अधिकारियों की वेतन विसंगति का निराकरण मान. उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार किये जाने, समस्त विषय के सहायक शिक्षक/उच्च श्रेणी शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक को वरिष्ठ और योग्यता के आधार पर पदोन्नति दिये जाने, विशेषकर जिन्होने स्नातक एवं स्नातकोत्तर जिस विषय में किया गया है उसमें पदोन्नति प्रदान किये जाने, पदोन्नति में डीईओं और बीईएड की अनिवार्यता को पदोन्नति उपरांत विभागीय बीईएड करवाये जाने, भृत्य का पदनाम परिवर्तित कर कार्यालय सहायक किये जाने, परिवार पेंशन के लिए ३३ वर्ष की अहर्ता सेवा को कम कर २५ वर्ष किये जाने, प्रदेश के सभी विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का तत्काल निराकरण किये जाने, नियमों का सरलीकरण करते हुए ३ वर्ष में सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता में संसोधन कर पूर्ण नियमों के अनुसार सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत वेतन वृध्दि का लाभ दिये जाने एवं सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति हेतु पात्रता परीक्षा एवं प्रशिक्षण की अनिवार्यता को समाप्त किये जाने सहित अन्य मांगे शामिल है।










































