इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने हाल ही में अरब सागर में अपनी नई ‘तैमूर’ एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल के नेवल वर्शन (नौसेना संस्करण) का परीक्षण किया है। पाकिस्तान नौसेना के बयान के मुताबिक इस मिसाइल टेस्ट का मकसद नौसेना की क्षमता को बढ़ाना था। पाकिस्तान एयरफोर्स के लिए पहले इस मिसाइल का टेस्ट किया गया था। पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का मानना है कि मई 2025 में भारत से संघर्ष के बाद उभरती रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इस मिसाइल का परीक्षण जरूरी थी। इस मिसाइल टेस्ट का मतलब भारत से टकराव से सबक लेकर पाकिस्तान की ‘आक्रामक स्टैंड-ऑफ रणनीति’ में बदलाव का संकेत देती हैं।
क्रूज मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत ये होती है कि इसे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इंटरसेप्ट करना अत्यंत मुश्किल होता है। पाकिस्तानी थिंक टैंक CISS ने लिखा है कि यह एक ‘नॉन-काइनेटिक’ रणनीति की शुरुआती झलक है जिसमें ‘तैमूर’ सेना की विभिन्न शाखाओं के बीच तालमेल वाली हमले की रणनीति का एक अहम हिस्सा होगा। थिंक टैंक ने बताया है कि भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का मुकाबला करने के लिए हाइपरसोनिक के बजाय सबसोनिक प्लेटफॉर्म की जरूरत थी।










































