माइनिंग इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हुए स्वास्तिक देशमुख

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पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। नगर मुख्यालय से लगभग ५ किमी दूर ग्राम पंचायत घोटी के अंतर्गत आने वाले ग्राम कटंगा निवासी कृषक रूपसेन (विनोद) देशमुख के छोटे पुत्र स्वास्तिक देशमुख ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। स्वास्तिक का चयन माइनिंग इंस्पेक्टर के पद पर हुआ है। उनकी इस गौरवमयी उपलब्धि से कटंगा घोटी सहित पूरे लालबर्रा क्षेत्र में हर्ष की लहर व्याप्त है। होनहार स्वास्तिक को बधाई देने के लिए उनके घर पर परिजनों, इष्ट मित्रों और शुभचिंतक पहुंचकर मिठाई खिलाकर बधाईयां दी है और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

आईआईटी कानपुर से कर रहे हैं पीएचडी

आपकों बता दे कि स्वास्तिक देशमुख की प्रारंभिक शिक्षा लालबर्रा में ही संपन्न हुई है। जिसके बाद वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भोपाल चले गये जहां से उन्होंने भूगर्भ शास्त्र (जियोलॉजी) विषय में एमएससी (स्नातकोत्तर) की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में स्वास्तिक अपनी शैक्षणिक योग्यता के बल पर देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर से भूगर्भ शास्त्र में पीएचडी कर रहे हैं। वहीं स्वास्तिक के परिवार के लिए यह दोहरी खुशी का अवसर है। उनके बड़े भाई संगीत देशमुख ने भी पूर्व में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता का परचम लहराया था। वर्तमान में वे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन में सहायक संचालक के पद पर छिंदवाड़ा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वास्तिक अपने परिवार के दूसरे ऐसे सदस्य हैं जो शासकीय सेवा के इस प्रतिष्ठित पद पर चयनित हुए हैं।

माइनिंग ऑफिसर बनाना है – स्वास्तिक

माइनिंग इंस्पेक्टर पद पर चयनित हुए स्वास्तिक देशमुख ने बताया एमपीपीएससी द्वारा आयोजित इस परीक्षा में दो भाग होते हैं—प्रथम प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन का और द्वितीय प्रश्न पत्र मुख्य विषय का होता है। चूंकि मैं भूगर्भ शास्त्र से ही पीएचडी कर रहा हूँ, इसलिए विषय पर मेरी पकड़ मजबूत थी और तैयारी भी निरंतर जारी थी। जिस दिन परिणाम घोषित हुआ, मुझे दोस्त के माध्यम से जानकारी मिली, लेकिन मुझे विश्वास नहीं हुआ, बाद में बड़े भाई ने जब स्वयं रिजल्ट चेक कर पुष्टि की, तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। यह मेरा दूसरा प्रयास था और मेरा अंतिम लक्ष्य माइनिंग ऑफिसर (खनिज अधिकारी) बनना है। श्री देशमुख ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बड़े भाई, गुरूजनों और मित्रों को देते हुए प्रतियोगी परीक्षा का तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों को संदेश देते हुए बताया कि तैयारी के दौरान हमेशा सिलेबस को पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। असफलताओं से घबराने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचानें, उन पर कड़ी मेहनत करने और निरंतर प्रयास करते रहने से निश्चित ही सफलता मिलती है।

बाईट – १ स्वास्तिक देशमुख चयनिता माइनिंग इंस्पेक्टर ।
२ रूपसेन (विनोद) देशमुख अभिभावक – कटंगा घोटी।

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