रिटायरमेंट के बाद भी लगता है टैक्स! सीनियर सिटीजंस की इन 7 कमाइयों पर ध्यान देना है जरूरी

0

कई लोगों को लगता है कि रिटायरमेंट के बाद इनकम टैक्स का झंझट खत्म हो जाता है। लेकिन, पेंशन से लेकर एफडी ब्याज तक सीनियर सिटीजंस की 7 ऐसी कमाइयां हैं, जिन पर आयकर विभाग टैक्स वसूलता है।आम तौर पर लोगों की धारणा होती है कि नौकरी या कारोबार से रिटायरमेंट (Retirement) लेने के बाद व्यक्ति टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाता है। हालांकि, आयकर कानून के मुताबिक टैक्स की देनदारी उम्र या रिटायरमेंट से नहीं, बल्कि आपकी सालाना आय (Annual Income) से तय होती है। यदि किसी सीनियर सिटीजन (60 वर्ष या उससे अधिक आयु) की कुल सालाना आय बेसिक टैक्स छूट सीमा (Tax Exemption Limit) से अधिक है, तो उन्हें इनकम टैक्स का भुगतान करना ही पड़ता है और आईटीआर (ITR) भी दाखिल करनी होती है। आइए जानते हैं वरिष्ठ नागरिकों की ऐसी 7 प्रमुख कमाइयों के बारे में जिन पर टैक्स लागू होता है।

इन 7 कमाई पर सीनियर सिटीजन को भी देना होगा टैक्स

  • पहला और मुख्य जरिया है पेंशन (Pension)। पूर्व नियोक्ता (Employer) से हर महीने मिलने वाली अनकम्यूटेड (Uncommuted) पेंशन को ‘सैलरी’ से होने वाली आय माना जाता है और यह संबंधित टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह टैक्स योग्य होती है।
  • दूसरा जरिया है बैंक एफडी (FD) और बचत खाते का ब्याज। सीनियर सिटीजंस को धारा 80TTB के तहत बैंक और पोस्ट ऑफिस ब्याज पर 50,000 रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है, लेकिन इससे अधिक ब्याज की रकम सीधी टैक्स के दायरे में आती है।
  • तीसरा स्रोत है किराये से होने वाली आय (Rental Income)। यदि किसी बुजुर्ग के पास अतिरिक्त मकान या दुकान है और उससे किराया आता है, तो ‘इन्कम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी’ के तहत 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद बची हुई रकम पर टैक्स लगता है।
  • चौथा जरिया है म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से कैपिटल गेन्स (Capital Gains)। रिटायरमेंट फंड को म्यूचुअल फंड या शेयरों में निवेश करने पर मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) और संपत्ति बेचने पर होने वाले शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर निर्धारित दरों से टैक्स चुकाना पड़ता है।
  • पांचवां स्रोत है एन्युटी (Annuity) और पेंशन स्कीम्स। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या जीवन बीमा कंपनियों की एन्युटी योजनाओं से हर महीने मिलने वाली नियमित राशि पूरी तरह से टैक्स योग्य होती है।
  • छठा जरिया है सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) और पोस्ट ऑफिस योजनाएं। हालांकि इनमें शुरुआती जमा पर 80C का फायदा मिलता है, लेकिन इनसे मिलने वाला तिमाही ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।
  • सातवां स्रोत है पार्ट-टाइम काम, कंसल्टेंसी या री-एंप्लॉयमेंट। रिटायरमेंट के बाद यदि कोई बुजुर्ग किसी संस्थान में सलाहकार या पार्ट-टाइम काम करके कमाई करते हैं, तो वह ‘प्रॉफिट्स एंड गेन्स फ्रॉम बिजनेस/प्रोफेशन’ या ‘अदर सोर्सेज’ के तहत टैक्स योग्य मानी जाती है।

Learn more

सितंबर के लिए ही बने हैं भारत के ये 7 टूरिस्ट प्लेस, इस बार कर लें एक्सप्लोर

जम्मू-कश्मीर में संदिग्ध गतिविधियों के बाद हाई अलर्ट, उधमपुर-रियासी-कठुआ में सर्च ऑपरेशन

BJP के नए डिजिटल बॉस की अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी कितनी मजबूत? फॉलोअर्स में बड़ा अंतर

चार साल बाद टेनिस कोर्ट पर एक साथ उतरीं विलियम्स बहनें, सिनसिनाटी ओपन के रोमांचक मुकाबले में मिली हार

बाइक Reserve Fuel पर कितनी दूर चल सकती है? बीच रास्ते में पेट्रोल खत्म होने से पहले जान लें ये बात

छप्परफाड़ लाभ को रेडी हो जाएं इन 5 राशियों के लोग, शनि-बुध ने बना लिया नवपंचम योग

SL vs IND: कौन है दुनिया का सबसे बढ़िया स्लिप का फील्डर? स्पिन के खिलाफ पकड़े हैं स्टीव स्मिथ से ज्यादा कैच

आरोपियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने के मामले में SC ने जारी किया नोटिस, मेटा-X की नीतियों पर भी सवाल

Richa Tripathi

और पढ़ें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here