वॉशिंगटन: यह बात किसी तबाही वाली फिल्म की कहानी की तरह लग सकती है लेकिन पूरी तरह सच है कि दुनिया भर में समुद्र के नीचे 8500 से ज्यादा जहाज डूबे पड़े हैं, जिनमें भारी मात्रा में ईंधन भरा हुआ है। यह समुद्री पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इनमें से ज्यादातर मलबा पहले और दूसरे विश्व युद्ध के समय का है। समुद्र की तलहटी में जंग खा रहे इन जहाजों में अभी भी लगभग 6 अरब गैलन ईंधन भरा हुआ है।
जहाजों का मलबे में दबा है बड़ा खतरा
इन जहाजों को डूबे हुए 100 साल या तो हो चुके हैं या फिर होने वाले हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे इनका स्टील का ढांचा कमजोर होता जा रहा है, मलबों से होने वाला प्रदूषण चरम पर पहुंच सकता है। बीते साल माइक्रोनेशिया में ऐसा देखा गया, जब जहाज से तेल रिसकर उस पानी में मिल रहा था जिस पर स्थानीय परिवार भोजन के लिए निर्भर हैं।
इस घटना के बाद लोगों को उस इलाके से हटाना पड़ा और मछली पकड़ने पर रोक लगानी पड़ी। इससे एक खतरा की आहट सुनाई पड़ती है कि अगर कोई बड़ा तूफान या भूकंप एक साथ कई मलबों को तोड़ दे, तो बड़ा पैमाने पर नुकसान हो सकता है।
समुद्र के नीचे 8500 जहाजों से खतरा
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, दुनिया भर में समुद्र की तलहटी में लगभग 30 लाख डूबे हुए और छोड़े गए जहाज हैं। इनमें से 8500 को ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले मलबे के तौर पर वर्गीकृत किया गया है। ज्यादातर मलबे दो विश्व युद्धों के समय के हैं। इन जहाजों के मलबों में 6 अरब गैलन भारी ईंधन के साथ ही हानिकारक केमिकल और बड़े पैमाने पर बिना फटे हथियार मौजूद हैं।










































