हमारे पढ़ाए बच्चे डॉ ,कलेक्टर और वैज्ञानिक बन गए! फिर हम परीक्षा क्यों दें

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बालाघाट।पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर 2011 के पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा)देना अनिवार्य किया है।सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षकों में नाराजगी है।जो लगातार बढ़ते जा रही हैं। यही कारण है कि वे लगातार इसका विरोध कर रहे है,अब शिक्षकों ने केन्द्र सरकार से मानसुन सत्र में परीक्षा आदेश को रद्ध करने को लेकर सांसद को ज्ञापन सौंपा है और विश्वास जताया कि शिक्षकों के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए सरकार अध्यादेश लाकर लाखो शिक्षकों को राहत देगी।जिसको लेकर रविवार को नगर मुख्यालय स्थित सांसद निवास पर मप्र. शास. प्राथ. एवं पूर्व माध्य. शिक्षक संघ ने सांसद भारती पारधी कार्यालय के एक ज्ञापन सौंपा है।जिसमे उन्होंने शिक्षको के लिए अनिवार्य की गई इस पुनः परीक्षा को तत्काल रद्द कराने की मांग की।उन्होंने स्पष्ठ किया कि परीक्षा पास करने के बाद ही वे शिक्षक बने हैं।अब शिक्षक बनने के इतने अधिक वर्ष के बाद उनसे पुनः परीक्षा क्यो ली जा रही है।उन्होंने टीईटी परीक्षा का लगातार विरोध करने,विरोध स्वरूप आंदोलन को तेज करने और मांग पूरी ना होने पर स्कूलों में तालाबंदी तक किए जाने की चेतावनी दी है।

बच्चो को पढ़ाते पढ़ाते बीत गए कईं साल, अब पात्रता परीक्षा क्यो?
हाल के वर्षों में सबसे बड़ा विवाद उन शिक्षकों को लेकर है जो 2009 के शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून और टीईटी व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन कार्यरत शिक्षकों के लिए भी टीईटी परीक्षा अनिवार्य की गई है।मप्र. शास. प्राथ. एवं पूर्व माध्य. शिक्षक संघ पदाधिकारियो के अनुसार पुराने शिक्षकों पर नया नियम लागू करना गलत है,कई शिक्षक 20-30 वर्षों से पढ़ा रहे हैं।उनका कहना है कि नियुक्ति के समय टीईटी की शर्त नहीं थी, इसलिए अब इसे लागू करना अनुचित है।बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें भी निर्धारित अवधि में टीईटी पास करना होगा, अन्यथा सेवा पर असर पड़ सकता है।बताया गया कि 45-55 वर्ष या उससे अधिक आयु के कई शिक्षक है,जिनके लिए लंबे समय बाद प्रतियोगी परीक्षा देना आसान नहीं है।

हमारे पढ़ाए बच्चे डॉ.,इंजी.,कलेक्टर और वैज्ञानिक, बन गए,ये परीक्षा हमारा अपमान है
मध्यप्रदेश शासन प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा कार्यरत शिक्षकों के लिए प्रस्तावित शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का कड़ा विरोध करते हुए सांसद के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्षों से शासकीय विद्यालयों में सेवा दे रहे शिक्षकों की योग्यता पर दोबारा प्रश्नचिह्न लगाना न केवल अनुचित है,बल्कि उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम भी है।ज्ञापन के माध्यम से संघ ने मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को टीईटी जैसी परीक्षा देने के लिए बाध्य न किया जाए। संघ का कहना है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा है, जिनके पढ़ाए छात्र आज प्रशासनिक अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, शिक्षक और विभिन्न शासकीय सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए कहना उनके अनुभव और योगदान का अपमान है।

टीईटी अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षक की वास्तविक परीक्षा उसके परिणाम और विद्यार्थियों की उपलब्धियां होती हैं। यदि उनके पढ़ाए छात्र आज देश और प्रदेश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं तो इससे बड़ा प्रमाण उनकी दक्षता का कोई नहीं हो सकता। ऐसे में सेवा के वर्षों बाद टीईटी अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर अनुभवी शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव बना रही है। इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है और विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण भी प्रभावित होगा। संघ ने सरकार से मांग की कि इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए तथा कार्यरत शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः छूट प्रदान की जाए।

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