2022 से परेशान करने वाली कॉल्स और मैसेज के खिलाफ शिकायतों में हर साल बढ़ोतरी हो रही है और हैरानी की बात यह है कि 82% से ज्यादा शिकायतें बिना रजिस्ट्रेशन वाले टेलीमार्केटर्स के खिलाफ की गई हैं। टेलीकॉम राज्य मंत्री पेम्मासानी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में एक डेटा शेयर किया। इससे पता चला है कि 2026 की पहली छमाही में ही 20.75 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। यह पिछले पूरे साल में आई कुल शिकायतों के लगभग 70% यानी दो-तिहाई से भी ज्यादा है। इसका मतलब साफ कि परेशान करने वाली कॉल्स के खिलाफ पिछले पूरा साल में जितना शिकायतें आई थीं। इस साल उसकी लगभग 70 प्रतिशत शिकायतें पहली तिमाही में ही आ चुकी हैं।
राज्यसभा सदस्य संजय सिंह के एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि एक्सेस प्रोवाइडर्स से मिले डेटा के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच कंपनियों के पास जो 20 लाख से ज्यादा अनचाही कॉल और मैसेज (UCC) की शिकायतें आईं, उनमें से 82% से भी ज्यादा यानी लगभग 17.21 लाख शिकायतें अनरजिस्टर्ड या बिना पहचान वाले टेलीमार्केटर्स के खिलाफ थीं। इसका मतलब है कि हर 100 में से 82 से ज्यादा शिकायतें उन अनजान नंबरों या कंपनिसाल 2025 में कुल मिलाकर 31.09 लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं थी। साल 2021 में परेशान करने वाले कॉलर्स (पेस्की कॉलर्स) के खिलाफ 12.84 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद यानी 2022 में, शिकायतों की संख्या घटकर 10.83 लाख हो गई। 2023 में शिकायतें लगभग 26% बढ़कर 13.62 लाख हो गईं,साल 2025 में कुल मिलाकर 31.09 लाख से ज्यादा शिकायतें मिलीं थी। साल 2021 में परेशान करने वाले कॉलर्स (पेस्की कॉलर्स) के खिलाफ 12.84 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद यानी 2022 में, शिकायतों की संख्या घटकर 10.83 लाख हो गई। 2023 में शिकायतें लगभग 26% बढ़कर 13.62 लाख हो गईं, फिर 2024 में 42% बढ़कर 19.38 लाख और 2025 में 60% बढ़कर 31.09 लाख हो गईं। जहां परेशान करने वाले कॉलर्स के खिलाफ शिकायतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। फिर 2024 में 42% बढ़कर 19.38 लाख और 2025 में 60% बढ़कर 31.09 लाख हो गईं। जहां परेशान करने वाले कॉलर्स के खिलाफ शिकायतों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।













































