106 साल पुरानी शिवाजी प्रतिमा को लेकर सिंधिया घराने पर भड़का आंग्रे परिवार, घोड़े का पैर काटने का मामला क्या है, जानिए

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Scindia Vs Angre: ग्वालियर में सिंधिया और आंग्रे परिवार का दशकों पुराना संपत्ति विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। आंग्रे परिवार ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि हिरण्यवन कोठी से छत्रपति शिवाजी महाराज की 106 साल पुरानी प्रतिमा को हटाने के दौरान उसके घोड़े के पैर तक काट दिए गए और उसे जयविलास पैलेस ले जाया गया।ग्वालियर: ऐतिहासिक राजघराने से जुड़े सिंधिया और आंग्रे परिवार का पुराना संपत्ति विवाद एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हिरण्यवन कोठी परिसर में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की 106 साल पुरानी प्रतिमा को लेकर आंग्रे परिवार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नया आवेदन दाखिल किया है, जिसमें प्रतिमा को हटाने के दौरान तोड़फोड़ करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिवाजी महाराज के घोड़े के पैर काटने का आरोप

मामले में चित्रलेखा आंग्रे और तुलाजी आंग्रे की ओर से हाई कोर्ट में दिए गए आवेदन में दावा किया गया है कि प्रतिमा को जल्दबाजी में शिफ्ट करने के लिए उसके घोड़े के पैर तक काट दिए गए। आरोप है कि इसके बाद मूर्ति को वहां से उठाकर जयविलास पैलेस ले जाया गया, जिससे परिवार की भावनाएं आहत हुई हैं और संपत्ति की पूर्व स्थिति से छेड़छाड़ की गई है।महाराष्ट्र से लाई गई थी ऐतिहासिक प्रतिमा

आवेदन में जानकारी दी गई है कि यह मूर्ति प्रसिद्ध मूर्तिकार विनायक पी. करमरकर द्वारा बनाई गई थी। इतिहास के मुताबिक, संभाजी राव आंग्रे इस मूर्ति को विशेष रूप से महाराष्ट्र के अलीबाग से ग्वालियर लेकर आए थे। इसके बाद इसे बसंत विहार और चेतकपुरी के बीच स्थित हिरण्यवन कोठी परिसर में एक मजबूत पत्थर के चबूतरे पर स्थापित किया गया था, जहां यह लंबे समय से मौजूद थी।

43 साल पुराना है संपत्ति का यह कानूनी विवाद

  • सिंधिया और आंग्रे परिवार के बीच इस संपत्ति को लेकर कानूनी लड़ाई चार दशक से अधिक पुरानी है।
  • 13 अगस्त 1983: इस मामले में सबसे पहले आंग्रे परिवार ने हिरण्यवन कोठी से जबरन बेदखल किए जाने का आरोप लगाया था।
  • 19 जुलाई 1985: मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला न्यायालय ने इस कोठी के लिए एक कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था।
  • 10 फरवरी 2005: निचली अदालत ने आंग्रे पक्ष के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें मामले में राहत दी थी।
  • वर्ष 2005: इस फैसले के खिलाफ ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं अन्य पक्षों ने ग्वालियर हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर इसे चुनौती दी।
  • 24 अगस्त 2026: अब हाल ही में आंग्रे परिवार ने कोर्ट में नया आवेदन देकर कोठी और वहां मौजूद प्रतिमा की पुरानी स्थिति को बहाल करने की मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्वालियर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अदालत में अब इस नए आवेदन पर सुनवाई और दोनों पक्षों के तर्कों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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