इंदौर। कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। एक 12 वर्षीय बच्चे पर कुत्ते ने ऐसा हमला किया कि वह आंत तक बाहर खींच लाया था। 56 दिन तक बच्चे का सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में इलाज चला, जिसके बाद उसे डिस्चार्ज किया गया। दरअसल, झाबुआ जिले के 12 वर्षीय बच्चे पर कुत्ते ने हमला कर बुरी तरह जख्मी कर दिया था। हमले में उसे कई गहरे घाव हो गए थे।
सबसे गंभीर घाव पेट और कमर के हुए। सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में बच्चे का इलाज शुरू किया। पीडियाट्रिक सर्जन डा. मनोज जोशी ने बताया कि बच्चे के शरीर में प्रोटीन और खून की भी कमी थी, जिससे घाव भरने में भी समय लग रहा था। इस पर विशेषज्ञों ने टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (टीपीएन) के जरिये विशेष पोषण देना शुरू किया। बच्चा अब स्वस्थ है। बच्चे के उपचार में डॉ. राम, डॉ. मनीष, डॉ. मेघना, डॉ. ऐश्वर्या गुप्ता आदि का सहयोग रहा।
डॉक्टरों ने नाम दिया धुरंधर
12 वर्षीय बच्चा 56 दिन तक मौत से लड़ता रहा। कई बीमारियां होने के बाद भी बच्चे ने हिम्मत नहीं हारी। इसलिए डॉक्टरों ने उसे धुरंधर नाम दिया है। जब वह डिस्चार्ज हुआ तो डॉक्टरों की टीम ने हार पहनाकर घर भेजा। बच्चे के पिता मजदूरी करते हैं।
इंदौर में तीन माह में 13 हजार से ज्यादा पर हमला
इंदौर में कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जनवरी से मार्च तक 13 हजार से ज्यादा लोगों पर कुत्तों द्वारा हमले किए जा चुके हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बावजूद सड़कों पर आवारा श्वानों का खौफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। आंकड़ों के मुताबिक मार्च माह में ही 4722 लोगों को घायल किया है। इन हमलों के शिकार सबसे अधिक महिलाएं और बच्चे हैं।
शहर के 20 से अधिक क्षेत्र बने डेंजर जोन
कुत्तों द्वारा हमले की बढ़ती घटनाओं के आधार पर शहर के कई क्षेत्र हाट स्पाट बन चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक हिना कालोनी, शाहीन नगर मुख्य मार्ग, जमजम चौराहा, आजाद नगर, चंदन नगर, मूसाखेड़ी, एकता नगर, शांतिनगर, मरीमाता चौराहा, बाणगंगा, कुलकर्णी नगर, हेमू कालानी, मुखर्जी नगर, बापट चौराहा, सुखलिया, विजय नगर, वीणा नगर, श्यामनगर, परदेशीपुरा, भानगढ़ आदि से सबसे अधिक कुत्तों के हमले के मामले सामने आते हैं।










































