40 की उम्र पार करते ही बदल दें निवेश का तरीका, बुढ़ापे में नहीं आएगी कोई परेशानी

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Financial planning in your 40s: उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की जिम्मेदारियां भी तेजी से बढ़ने लगती हैं। शादी के बाद बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और रिटायरमेंट की तैयारी जैसे कई वित्तीय लक्ष्य सामने आने लगते हैं। ऐसे में निवेश की रणनीति भी उम्र और जरूरतों के हिसाब से बदलना जरूरी हो जाता है। 40 की उम्र के बाद निवेश की रणनीति को कैसे बदला जाना चाहिए इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं-वित्तीय लक्ष्यों को दोबारा रिव्यू करें

40 की उम्र के बाद बेहद जरूरी है कि आप अपने वित्तीय लक्ष्यों को दोबारा रिव्यू करें। 40 की उम्र तक व्यक्ति को यह साफ समझ होनी चाहिए कि अगले 10-20 साल में किन लक्ष्यों के लिए पैसे की जरूरत पड़ेगी। जैसे बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी, घर का लोन खत्म करना या रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना। लक्ष्य पता होने पर सही निवेश प्लानिंग करना बहुत हद तक आसान हो जाता है।

निवेश को अलग-अलग जगहों पर बांटें

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि 40 की उम्र के बाद निवेश को अलग-अलग जगहों पर बांटने पर ध्यान देना चाहिए। केवल शेयर बाजार या इक्विटी म्यूचुअल फंड पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए निवेश को कई विकल्पों में बांटना जरूरी माना जाता है। इसमें शेयर आधारित योजनाएं, डेट फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, बॉन्ड और सोना जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।इमरजेंसी फंड को मजबूत बनाएं

इसके अलावा, इमरजेंसी फंड को मजबूत बनाना भी इस उम्र में बेहद जरूरी माना जाता है। नौकरी में अनिश्चितता, स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें या अचानक आने वाले बड़े खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकते हैं। इसलिए कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च जितनी राशि आपातकालीन फंड में रखने की सलाह दी जाती है। इसे बचत खाते या लिक्विड फंड में रखा जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके।

स्वास्थ्य बीमा और टर्म बीमा पर दें ध्यान

स्वास्थ्य बीमा और टर्म बीमा पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। 40 के बाद इलाज का खर्च तेजी से बढ़ सकता है। अगर पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा नहीं हो, तो बचत पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी तरह परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए पर्याप्त टर्म बीमा भी जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि बीमा को निवेश नहीं बल्कि सुरक्षा के साधन के रूप में देखना चाहिए।

रिटायरमेंट की योजना को न टालें

इस उम्र में रिटायरमेंट की योजना को टालना बड़ी गलती साबित हो सकती है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 40 के बाद रिटायरमेंट फंड तैयार करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसके लिए एसआईपी, एनपीएस, पीपीएफ और रिटायरमेंट आधारित म्यूचुअल फंड जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जितनी जल्दी नियमित निवेश शुरू होगा, चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा उतना ज्यादा मिलेगा।

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