पंजाब की राजनीति में करीब छह दशकों का लंबा अनुभव रखने वाले दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का केंद्रीय या राज्य नेतृत्व पंजाब से जुड़े नीतिगत और राजनीतिक फैसलों पर उनसे कोई सलाह नहीं लेता है।Amarinder Singh: पंजाब विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से पहले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के एक ताजा बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। लंबे समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सितंबर 2022 में अपनी पार्टी ‘पंजाब लोक कांग्रेस’ का भाजपा में विलय करने और पार्टी में शामिल होने के बाद भी उनकी राय नहीं ली जाती है।
“60 साल का राजनीतिक अनुभव, लेकिन “
पंजाब की राजनीति में करीब छह दशकों का लंबा अनुभव रखने वाले दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का केंद्रीय या राज्य नेतृत्व पंजाब से जुड़े नीतिगत और राजनीतिक फैसलों पर उनसे कोई सलाह नहीं लेता है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में कैप्टन ने कहा, मैंने पंजाब के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और लंबे समय से राज्य की सेवा की है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्थिति ऐसी रही कि पंजाब की राजनीति, यहां की प्राथमिकताओं और रणनीतियों को लेकर भाजपा ने मुझसे एक बार भी चर्चा या बैठक नहीं की। दिल्ली या केंद्रीय नेतृत्व पंजाब के मिजाज और जमीनी हकीकत को सही ढंग से नहीं समझ पाया है।
“अकाली दल से गठबंधन करे बीजेपी”
राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर बेबाक राय रखते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा नेतृत्व को अहम सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और राज्य में सरकार बनाने की दौड़ में आना चाहती है, तो उसे अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ दोबारा गठबंधन करना चाहिए। बिना क्षेत्रीय सहयोग और पुराने साथियों को साथ लिए पंजाब की सत्ता तक पहुंचना पार्टी के लिए बेहद मुश्किल होगा।कांग्रेस में वापसी की अटकलों को खारिज किया
कैप्टन द्वारा भाजपा से नाराजगी जताए जाने के बाद उनके दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने इन सभी चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया। उनका कांग्रेस में वापस जाने का कोई इरादा या योजना नहीं है। सक्रिय चुनावी राजनीति और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहने के उनके दिन अब बीत चुके हैं। उन्होंने कहा कि अपनी बात रखना और पंजाब के हित में सलाह देना उनका अधिकार और जिम्मेदारी है, इसका मतलब यह नहीं कि वे भाजपा छोड़ रहे हैं।
आप और राज्य सरकार पर भी साधा निशाना
पंजाब के मौजूदा हालातों पर टिप्पणी करते हुए पूर्व सीएम ने भगवंत मान सरकार पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। नशे का कारोबार दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, सीमा पार से ड्रोनों के जरिए हथियार और ड्रग्स की सप्लाई हो रही है, किसान असंतुष्ट हैं और बेरोजगारी चरम पर है।
राजनीतिक मायने
2021 में कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन ने अपनी नई पार्टी बनाई थी और बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था। लेकिन अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के आंतरिक कामकाज और उपेक्षा को लेकर उनके इस खुले बयान ने भाजपा के पंजाब चुनाव अभियान और अंदरूनी गुटबाजी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।










































