पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच एक नई आशंका ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अभी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लेकर भी समस्या चल रही है लेकिन एक नई आशंका ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ईरान पूरी दुनिया के इंटरनेट को भी प्रभावित कर सकता है? होर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही ऊर्जा सप्लाई के लिए अहम मार्ग है, लेकिन अब यह डिजिटल दुनिया के लिए भी खतरे का केंद्र बनता दिख रहा है, क्योंकि यहां से गुजरने वाली समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर खतरा मंडरा रहा है।
समुद्र के नीचे छिपी हैं इंटरनेट की लाइफलाइन
दुनिया का अधिकांश इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और वीडियो कॉल, ईमेल, बैंकिंग और AI सेवाओं तक सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य ऐसे ही अहम रूट हैं, जहां से ये केबल्स गुजरती हैं।
रेड सी और होर्मुज में मौजूद हैं कई केबल्स
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेड सी में कम से कम 17 सबसी केबल्स मौजूद हैं, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ती हैं। वहीं, होर्मुज के रास्ते AAE-1, FALCON, गल्फ ब्रिज अंतर्राष्ट्रीय केबल सिस्टम और Tata-TGN Gulf जैसी अहम केबल्स गुजरती हैं, जो भारत समेत कई देशों के डेटा कनेक्शन के लिए बेहद जरूरी हैं।













































