दुनिया के अन्य देशों के साथ ही प्रदूषण भारत के लिए भी बड़ी चिंता बना हुआ है। भारत में यह समस्या इसलिए और भी बड़ी है, क्योंकि आम जनता इस ओर काफी कम ध्यान देती है और अक्सर सरकारों भी इस ओर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेती हैं। विशेष तौर पर दिल्ली-एनसीआर तो प्रदूषण के लिहाज से बहुत ही कुख्यात है। देश में NCR का लोनी क्षेत्र साल 2025 में सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा है, जहां पीएम 2.5 का स्तर 112.5 ग्राम पाया गया।
लेकिन वैश्विक वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में इस बार जो आंकड़े आए हैं वह चौंकाने वाले हैं। पिछले आठ वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब भारत सबसे प्रदूषित देशों की सूची में टॉप 5 से बाहर हो गया है। इस लिस्ट में भारत अब छठे स्थान पर पहुंच गया है, जहां औसत PM2.5 स्तर 49.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, रैंकिंग में गिरावट के बावजूद देश में वायु प्रदूषण अब भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
इस रिपोर्ट के अनुसार इस बार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान ने बाजी मारी है। पाकिस्तान इस सूची में पहले स्थान पर है, जहां वार्षिक औसत PM2.5 स्तर 67.3 दर्ज किया गया। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्धारित मानक से करीब 13.4 गुना ज्यादा है और बेहद चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है।
इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर भी हमारा एक पड़ोसी देश ही है, जिसका नाम बांग्लादेश है। बांग्लादेश में साल 2025 में PM2.5 स्तर 66.1 रहा, जो WHO की तय सीमा से लगभग 13.2 गुना ज्यादा है।
लिस्ट में तीसरे स्थान पर ताजिकिस्तान है, जहां प्रदूषण का स्तर 57.3 दर्ज हुआ, जो WHO के मानकों से 11.4 गुना अधिक है। इसके बाद अफ्रीकी देश चाड का नंबर आता है, जो 53.6 PM2.5 स्तर के साथ चौथे स्थान पर है। चाड़ में प्रदूषण का स्तर तय सीमा से 10.7 गुना ज्यादा है। वहीं, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) 50.2 PM2.5 स्तर के साथ पांचवें स्थान पर है, जो WHO की गाइडलाइन से ठीक 10 गुना अधिक है।
भले ही भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और देश टॉप पांच देशों की लिस्ट से बाहर हो गया है, लेकिन प्रदूषण का स्तर अब भी सुरक्षित सीमा से काफी ऊपर है। शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों का बढ़ता दबाव और पराली जलाने जैसी समस्याएं हमारे देश में वायु गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित कर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक PM2.5 के उच्च स्तर से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।









































