महाकुंभ वाली लड़की की उम्र को लेकर विवाद, मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बीच ‘वायरल गर्ल’ ने चली बड़ी कानूनी चाल

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बड़वानी: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से जुड़ा चर्चित महाकुंभ वायरल गर्ल मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में बना हुआ है। नाबालिग लड़की के कथित निकाह और उससे जुड़े विवाद को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मंगलवार को कहा कि इस मामले में खरगोन पुलिस को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन फिलहाल आयोग को जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

कानूनगो ने पत्रकारों से की बात

मंगलवार शाम बड़वानी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कानूनगो ने कहा कि आयोग को एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि महाकुंभ मेले के दौरान वायरल हुई नाबालिग लड़की का केरल में निकाह कराया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख था कि विवाह समारोह में कुछ प्रभावशाली राजनेता और अधिकारी भी शामिल थे।

खरगोन पुलिस को दिया नोटिस

उन्होंने कहा कि भारत में बाल विवाह अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर खरगोन पुलिस को नोटिस जारी कर मामले में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निकाह की प्रक्रिया की जांच में किसी राजनीतिक व्यक्ति या सरकारी अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

मार्च में मिली थी शिकायत

दरअसल, आयोग को 27 मार्च 2026 को एक शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि महेश्वर की एक किशोरी, जो महाकुंभ मेले के दौरान रुद्राक्ष बेचते हुए वायरल वीडियो के कारण चर्चा में आई थी, उसने उस वीडियो में अपनी उम्र करीब 16 वर्ष बताई थी। इसके बावजूद उसका विवाह केरल में फरमान खान नामक युवक से करा दिया गया, जो कानूनन अपराध हो सकता है।

शिकायत में लड़की की उम्र से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी, गलत जानकारी देने तथा विवाह में दबाव, धोखाधड़ी या पहचान छिपाने जैसी आशंकाएं भी जताई गई थीं। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

7 दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा मानते हुए NHRC ने अप्रैल के पहले सप्ताह में खरगोन पुलिस अधीक्षक को विस्तृत जांच कर सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। साथ ही मध्य प्रदेश और केरल प्रशासन को संयुक्त जांच करने को भी कहा गया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि यदि लड़की के नाबालिग होने की पुष्टि होती है, तो पॉक्सो एक्ट और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीड़िता की सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए थे।

अदालत ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

इधर, अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय चेयरमैन अंतर सिंह आर्य द्वारा कराई गई अलग जांच में भी लड़की को नाबालिग पाया गया था। इसके बाद आयोग ने खरगोन पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने और निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इसी आधार पर महेश्वर पुलिस ने फरमान खान के खिलाफ नाबालिग से विवाह करने के मामले में अपहरण का प्रकरण दर्ज किया था। हालांकि फरमान खान और लड़की ने केरल हाई कोर्ट की शरण ली, जहां अदालत ने फरमान खान की गिरफ्तारी पर 20 मई तक अंतरिम रोक लगा दी थी।

मोनालिसा ने लगाए सर्टिफिकेट में छेड़छाड़ के आरोप

वहीं, खरगोन के पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने कहा कि एनएचआरसी के संबंधित सेक्शन को एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि फरमान खान की गिरफ्तारी और अन्य बिंदुओं की जांच के लिए खरगोन पुलिस की टीम दो बार केरल भेजी जा चुकी है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, 20 मई को केरल हाईकोर्ट में अगली सुनवाई प्रस्तावित है, जिसके बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

27 मार्च 2026‘वायरल गर्ल’ के नाबालिग होने और केरल में निकाह किए जाने की शिकायत NHRC में दर्ज।
अप्रैल का पहला हफ्तामानवाधिकार आयोग ने खरगोन एसपी को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
पुलिसिया कार्रवाईएसटी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर महेश्वर पुलिस ने आरोपी फरमान खान पर केस दर्ज किया।
केरल हाई कोर्ट का रुखआरोपी फरमान खान और लड़की केरल पहुंचे; कोर्ट ने फरमान की गिरफ्तारी पर 20 मई तक रोक लगाई।
नया मोड़ (हाई कोर्ट याचिका)लड़की ने एमपी हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका लगाई; जन्म प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया।

उधर महाकुंभ वायरल गर्ल ने अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है। उसने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उसके अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र में फर्जी तरीके से बदलाव किया गया। याचिका में मूल जन्म प्रमाणपत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।

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