नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने विदेशी फंड पाने के नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत गैर सरकारी संगठनों (NGOs) को पहले से तय कामों और अपने काम के दायरे की लिस्ट में से चुनना होगा। इसमें धर्म से जुड़ी कई तरह की गतिविधियों की इजाजत तो है, लेकिन ‘फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट’ ( FCRA ) के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य कई कैटेगरी में धर्म-परिवर्तन को साफ तौर पर बाहर रखा गया है। सोमवार को जारी एक सरकारी नोटिफिकेशन में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि अगर किसी संगठन के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो उन्हें इस कानून के तहत विदेशी फंड लेने के लिए रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी देने पर ‘आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा’।एनजीओ को पैसे का ओरिजिनल सोर्स बताना होगा
- केंद्रीय गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक, बदले हुए नियमों में एक अपवाद भी रखा गया है। इसके तहत केंद्र सरकार एक आदेश के ज़रिए ऐसे मामलों या हालात तय कर सकती है जिनमें विदेशी नागरिकों को FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या पहले से मंज़ूरी के लिए किसी संगठन का ‘मुख्य पदाधिकारी’ बनने की इजाजत दी जा सकती है।
- नियमों के अनुसार, अगर पैसा ‘इंटरमीडियरी रेमिटेंस व्हीकल्स’ या ‘डोनर एडवाइज्ड फंड्स’ के जरिए आता है, तो NGO को अपनी एप्लीकेशन में असली डोनर (पैसे का ओरिजिनल सोर्स) के बारे में बताना होगा।
- नियमों के मुताबिक, अब सालाना रिटर्न में फाइनेंशियल स्टेटमेंट के साथ-साथ ‘विस्तृत एक्टिविटी रिपोर्ट’ भी शामिल करनी होगी।
- NGO को यह बताना होगा कि क्या उन्होंने या उनके मुख्य लोगों ने कोई किताब या लेख पब्लिश किया है, क्योंकि उन्हें ‘न्यूज या करंट अफेयर्स’ बनाने या ब्रॉडकास्ट करने की मनाही है।
एनजीओ को सोशल मीडिया पर देनी होगी जानकारी
सरकार ने कहा है कि वह फंड के इस्तेमाल की जांच के लिए फील्ड इंक्वायरी करेगी। विदेश से फंड पाने वाले NGO को अब FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल के लिए अपनी एप्लीकेशन में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि ‘पूर्व अनुमति’ (Prior Permission) के तहत किसी खास मकसद के लिए विदेशी फंड पाने वाले NGO को फंड की दूसरी या उसके बाद की कोई भी किस्त तभी जारी की जाएगी, जब उसने पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा इस्तेमाल कर लिया हो।










































